बुलंद सोच, छतरपुर।
गुरुवार सुबह थाना क्षेत्र के बहारगंज निवासी 35 वर्षीय मथू पाल, पिता धरमदास पाल, के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सटई ले गए, लेकिन आरोप है कि वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। प्राथमिक उपचार के बजाय युवक को जिला अस्पताल छतरपुर रेफर कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि यदि तत्काल उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। आरोप है कि रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का आक्रोश और चक्काजाम
युवक की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग सटई बस स्टैंड पर एकत्र हुए और सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सटई स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की अनुपस्थिति कोई नई बात नहीं है और कई बार शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, जिसका खामियाजा अब लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन का हस्तक्षेप
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुनीता बिंदुआ सहित आसपास के चार थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित तैनाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। हालांकि, थाना प्रभारी और मौके पर पहुंचे सटई तहसीलदार लक्ष्मी प्रसाद अहिरवार की काफी देर तक समझाईस देने के बाद प्रदर्शनकारियों को शांत कराया गया।

