बुलंद सोच, ग्वालियर।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) नौकरीपेशा लोगों के लिए केवल भविष्य निधि (पीएफ) जमा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। कर्मचारियों के हित में लगातार नई योजनाएं और डिजिटल सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कर्मचारियों और आमजन की अपने अधिकारों व उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूकता से ही मिल सकता है। नईदुनिया के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘विमर्श’ में ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त सत्यवर्धन गौतम ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
आयुक्त गौतम ने बताया कि ईपीएफओ का मूल उद्देश्य कर्मचारियों को केवल नौकरी के दौरान ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़ी व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी होगा, जब कर्मचारी अपने अधिकारों को समझेंगे और जागरूक होंगे।
क्षेत्रीय आयुक्त के अनुसार, ईपीएफओ डिजिटल माध्यम से व्यवस्था को लगातार आसान बनाने की दिशा में कार्यरत है, लेकिन कर्मचारी की जागरूकता इस पूरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पीएफ खाते को केवल नौकरी के दौरान कटने वाली राशि के रूप में देखने के बजाय इसे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और परिवार के सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में समझने की आवश्यकता है। तकनीक व्यवस्था को आधुनिक बना सकती है, किंतु उसका पूरा लाभ उठाने के लिए जागरूकता आवश्यक है, जो ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
तीन स्तरों पर मिलती है सामाजिक सुरक्षा
आयुक्त ने बताया कि ईपीएफओ की व्यवस्था व्यापक रूप से कर्मचारी को तीन तरह की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें पहला, कर्मचारी के भविष्य के लिए भविष्य निधि यानी पीएफ की बचत शामिल है। दूसरा, सेवा के बाद नियमित आय के लिए पेंशन से जुड़ी व्यवस्था है। तीसरा, कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने वाली बीमा व्यवस्था है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी को यह जानकारी होना आवश्यक है कि उसके वेतन से पीएफ के नाम पर कितनी राशि कट रही है, नियोक्ता की ओर से कितना योगदान जमा हो रहा है और उसके खाते में राशि नियमित रूप से पहुंच रही है या नहीं। डिजिटल व्यवस्था के कारण अब इन जानकारियों को देखना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
डिजिटल प्रणाली का उन्नयन और नियोक्ता की भूमिका
आयुक्त गौतम ने आगे बताया कि ईपीएफओ अपनी कार्यप्रणाली को तकनीक के साथ लगातार उन्नत कर रहा है। एक नए सॉफ्टवेयर से इसी दिशा में कदम उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सिस्टम को अधिक व्यवस्थित, आधुनिक और प्रभावी बनाना है। इससे कार्यालयीन कामकाज और सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि रिकॉर्ड और सेवाओं तक पहुंच को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था केवल ईपीएफओ और कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं है, इसमें नियोक्ता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नियोक्ताओं को कर्मचारियों का सही विवरण दर्ज कराने, निर्धारित योगदान समय पर जमा करने और रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में गंभीरता बरतनी चाहिए।

