बुलंद सोच, जबलपुर।
हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की कथित मौत और उनकी देखरेख में लापरवाही के मामले में हाई कोर्ट ने घोड़ों की खरीद-बिक्री को लेकर सामने आए विरोधाभासी दावों पर गंभीर रुख अपनाया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने निर्देश दिए कि रिकॉर्ड पर यह बताया जाए कि कितने घोड़े बेचे गए, किसे और कब बेचे गए।
युगलपीठ ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कितने घोड़े खरीदे गए।
कोर्ट ने खरीद-बिक्री से संबंधित सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
घोड़ा मालिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि सभी घोड़े बेच दिए गए हैं।
जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की याचिका में आरोप है कि हैदराबाद से 57 रेस के घोड़ों को बिना प्रशासन को सूचना दिए फार्म हाउस लाया गया था।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उचित देखभाल के अभाव में कई घोड़ों की मौत हुई।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में केयरटेकर ने शपथपत्र में 19 घोड़ों की मौत, 22 घोड़ों की बिक्री और तीन नए घोड़े खरीदने की जानकारी दी थी।
हालांकि, बाद में सभी घोड़े बेचने का दावा किया गया।
इन्हीं विरोधाभासी तथ्यों के मद्देनजर हाई कोर्ट ने अब पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड तलब किया है।

