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2026-07-29

कर्नाटक: एमएलसी सीटी रवि के खिलाफ हेट स्पीच मामले पर राजनीतिक विवाद तेज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, बंगलूरू।

कर्नाटक में भाजपा एमएलसी और पूर्व मंत्री सीटी रवि के खिलाफ दर्ज हेट स्पीच मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। रविवार को उनके आवास पर नोटिस देने पहुंची पुलिस की कार्रवाई के बाद भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने बंगलूरू में पत्रकारों से बातचीत में चेतावनी दी कि यदि सीटी रवि की गिरफ्तारी से राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कांग्रेस नेताओं के इशारे पर काम कर रही है।
विजयेंद्र ने आगे कहा कि पुलिस सिर्फ नोटिस देने नहीं, बल्कि सीटी रवि को गिरफ्तार करने के इरादे से पहुंची थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए थे, तब सरकार ने क्या कार्रवाई की थी।
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर सीटी रवि से बात की है। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के डीजी और आईजीपी एमए सलीम से भी चर्चा की है।
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री वी सुनील कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विरोधी आवाजों को दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है।
सुनील कुमार ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट पहले भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता जता चुका है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस सरकार के एजेंट की तरह काम कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सीटी रवि के खिलाफ किसी भी दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुनील कुमार ने कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे पर भी निशाना साधा और कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार जितना उन्हें है, उतना ही सीटी रवि को भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों को पकड़ने के बजाय सोशल मीडिया पोस्ट और भाषणों की जांच में पुलिस अधिकारियों को लगा रही है।

पूरा मामला

यह विवाद उस बयान से जुड़ा है, जो सीटी रवि ने कथित तौर पर चिक्कमगलुरु में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान दिया था।
एफआईआर के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर कहा था, ‘मुल्ला का नीट परीक्षा से क्या संबंध है? जो पूरी तरह अशिक्षित है, वह नीट के विरोध प्रदर्शन में आकर शामिल हो रहा है’।
इस बयान को सांप्रदायिक और भड़काऊ बताते हुए चिक्कमगलुरु जामिया मस्जिद के अध्यक्ष मुदस्सिर पाशा ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।

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