बुलंद सोच, शिवपुरी।
शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील के अंतर्गत स्थित एसडीएम कार्यालय में मंगलवार को हड़कंप मच गया। कार्यालय में अटैच एक पटवारी ने नशे की हालत में संदिग्ध पदार्थ खा लिया। आनन-फानन में पटवारी को कोलारस अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल पटवारी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के अनुसार, अब पटवारी की स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। रन्नौद तहसील के इचौनिया हल्के में पदस्थ और वर्तमान में एसडीएम कार्यालय में अटैच पटवारी प्रदीप गुप्ता 28 जुलाई को नशे की धुत हालत में कोलारस एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने कोई संदिग्ध पदार्थ निगल लिया और स्वयं ही कर्मचारियों को इसकी सूचना दी। पटवारी की बात सुनते ही दफ्तर में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया।
पटवारी का दावा और एसडीएम का पलटवार
अस्पताल में भर्ती पटवारी प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उन्हें पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से परेशान होकर ही उन्होंने जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। इस मामले में कोलारस एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने पटवारी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं। एसडीएम श्रीवास्तव ने कहा कि रन्नौद में पदस्थापना के दौरान पटवारी प्रदीप गुप्ता ने जमीनों की हेराफेरी की थी, जिसके चलते उन पर दस विभागीय जांचें लंबित हैं। उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को ही इनमें से कुछ मामलों में पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे। एसडीएम के अनुसार, इसी कार्रवाई से बचने और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए पटवारी ने 28 जुलाई को यह नाटक रचा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पटवारी ने कोई जहरीला पदार्थ खाया भी है या सिर्फ अत्यधिक शराब (ओवरडोज) पीने से उनकी तबीयत बिगड़ी है। एसडीएम श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि अगर जांच में यह साजिश साबित होती है, तो पटवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए तहसीलदार को जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
वेतन रोकने और देरी की स्थिति स्पष्टीकरण
एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने वेतन रोकने के मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पटवारी अपने हल्के और दफ्तर से लगातार नदारद रहते थे, जिसके कारण मार्च महीने का वेतन तहसीलदार द्वारा रोका गया था। उन्होंने आगे बताया कि अप्रैल, मई और जून में रन्नौद में लगातार तीन तहसीलदार बदले गए, जिससे ‘डीडीओ आईडी’ जनरेट नहीं हो पाई। इस वजह से पूरी तहसील के कर्मचारियों का वेतन रुका हुआ था। एसडीएम श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि सोमवार को आईडी बनते ही सभी का वेतन जारी कर दिया गया है। 29 जुलाई को अन्य कर्मचारियों के साथ पटवारी प्रदीप गुप्ता का भी वेतन जनरेट हो चुका है।

