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2026-07-29

मध्य प्रदेश: एमबीबीएस ट्यूशन फीस में देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य, इंटर्नशिप स्टाइपेंड में पिछड़ा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। इस बीच, देश के विभिन्न राज्यों की एमबीबीएस ट्यूशन फीस के तुलनात्मक आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की ट्यूशन फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य है।

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प्रदेश में छात्रों से सालाना 1,00,000 रुपये ट्यूशन फीस ली जा रही है। वहीं, इंटर्नशिप के दौरान मानदेय (स्टाइपेंड) देने के मामले में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है।

वार्षिक ट्यूशन फीस का गणित

राज्यों की वार्षिक ट्यूशन फीस की सूची में पंजाब 1,83,000 रुपये के साथ देश में पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र 1,52,000 रुपये वार्षिक फीस के साथ दूसरे स्थान पर है।

उत्तराखंड 1,45,000 रुपये के साथ तीसरे और केरल 1,19,835 रुपये फीस के साथ चौथे स्थान पर है। मध्य प्रदेश 1 लाख रुपये सालाना फीस के साथ पांचवें पायदान पर है।

कम फीस वाले राज्यों में अधिक स्टाइपेंड

यह तथ्य चौंकाने वाला है कि जिन राज्यों में मेडिकल शिक्षा की ट्यूशन फीस मध्य प्रदेश की तुलना में काफी कम है, वहां इंटर्न डॉक्टरों को कहीं अधिक मानदेय दिया जा रहा है। ओडिशा में वार्षिक फीस 22,000 रुपये है, जबकि इंटर्न्स को 44,319 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है। पश्चिम बंगाल में फीस मात्र 11,350 रुपये है, और स्टाइपेंड 43,099 रुपये दिया जा रहा है।

तमिलनाडु और झारखंड राज्यों में एमबीबीएस की सालाना ट्यूशन फीस 10 हजार रुपये से भी कम, यानी 6,000 रुपये है। इसके बावजूद, वहां डॉक्टरों को 25,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है।

इंटर्न डॉक्टरों की मांग

इसके विपरीत, मध्य प्रदेश में छात्र हर साल एक लाख रुपये ट्यूशन फीस जमा करते हैं। अस्पतालों में 24 से 36 घंटे की कठिन ड्यूटी के बाद भी उन्हें मात्र 14,337 रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलता है। इसी भारी आर्थिक असंतुलन के विरोध में प्रदेश के करीब 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर सड़कों पर उतरे हुए हैं। वे स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं।