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2026-08-07

मध्य प्रदेश में सामान्य से 19% कम बारिश, खरीफ फसलों पर संकट

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। 5 अगस्त तक प्रदेश भर में औसतन 16.27 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 19.97 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस कमी के चलते खेतों में खड़ी धान, सोयाबीन और मक्का की फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की गंभीर आशंका बन गई है।

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क्षेत्रीय वर्षा की स्थिति

प्रदेश के सबसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्र यानी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का अंतर सर्वाधिक देखा जा रहा है। यहां सामान्य 21.90 इंच वर्षा के मुकाबले अब तक महज 17.02 इंच बारिश ही दर्ज हुई है, जो कि 22% कम है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी सामान्य से 15% कम पानी बरसा है। राजधानी भोपाल में 22.68 इंच के सामान्य आंकड़े के मुकाबले 21.87 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है।

खेतों की मौजूदा हालत

पानी न मिलने के कारण धान की क्यारियां सूखने लगी हैं। राजधानी के कोलार क्षेत्र समेत कई इलाकों में खेतों की हालत बिगड़ने लगी है। बारिश का इंतजार लंबा होता देख कई किसानों ने ट्यूबवेल से खेतों में पानी भरकर बोवनी और फसलों की रोपाई शुरू की है।

फसल उत्पादन पर विशेषज्ञ राय

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में ‘ड्राई स्पेल’ (लंबे समय तक सूखा रहने) का फसलों की शारीरिक संरचना पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पानी की कमी से धान में ‘टिलरिंग’ (पौधों के फुटाव) की प्रक्रिया प्रभावित होती है। वहीं, सोयाबीन में फूल और फलियां झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है और मक्का में दाना बनने की प्रक्रिया काफी कमजोर पड़ जाती है, जिससे इस बार उत्पादन में कमी आने की पूरी आशंका है।

इस बीच, मध्य प्रदेश के 8 हजार किसानों को सौगात मिली है। उनके खातों में 107.72 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। यह मुआवजा 188 गांवों के अन्नदाताओं को प्राप्त हुआ है।