बुलंद सोच,।
मध्य प्रदेश विधानसभा से एक नया श्रम कानून पारित किया गया है। इस कानून के तहत, अब कोई भी नियोक्ता अपने कर्मचारियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र या पासपोर्ट अपने पास नहीं रख सकेगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी की सहमति के बिना उसका स्थानांतरण भी नहीं किया जा सकेगा।
'राइट टू डिस्कनेक्ट' और कार्य समय निर्धारण
इस विधेयक में पहली बार कर्मचारियों को ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ का अधिकार प्रदान किया गया है। इसका अर्थ है कि कर्मचारी को तय कार्य समय के बाद काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कर्मचारी को ड्यूटी के बाद भी उपलब्ध रहने के लिए कहा जाता है, तो उस समय को ओवरटाइम माना जाएगा। नए कानून के अनुसार, एक दिन में अधिकतम 12 घंटे तक ही काम कराया जा सकेगा।
रात्रि पाली और जोखिम वाले कार्यस्थलों पर लाभ
कानून में रात की पाली या जोखिम वाले कार्यस्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। महिलाओं के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रावधान शामिल किए गए हैं। अब महिलाओं से रात्रि पाली में तभी काम कराया जा सकेगा, जब वे लिखित सहमति दें। साथ ही, नियोक्ता को उनके लिए मुफ्त और सुरक्षित परिवहन तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का समावेशन
इस कानून के दायरे में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले कर्मचारी, कैब चालक और ऐसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिक शामिल होंगे। इन श्रमिकों को इस कानून के तहत अधिकार और सुरक्षा मिलेगी।
बेगार और शोषण पर रोक
विधेयक में बेगार (जबरन श्रम) और श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने के भी प्रावधान किए गए हैं। इसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
