बुलंद सोच, भोपाल।
उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में बताया कि वर्ष 2016 से जीएसटी लागू हुआ है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इसमें कई संशोधन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य व्यापारियों और करदाताओं को सुविधा प्रदान करना है। देवड़ा ने स्वीकार किया कि अभी भी कई कठिनाइयां हैं, जो समय-समय पर सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि इन कठिनाइयों को संशोधनों के माध्यम से दूर किया जा रहा है और प्राप्त सुझावों को जीएसटी काउंसिल में भी भेजा जाता है। जीएसटी के अनुभवों के आधार पर संशोधन किए जा रहे हैं, जिन्हें भारतीय संसद और जीएसटी काउंसिल में पहले ही पारित किया जा चुका है। देवड़ा ने कहा कि ये संशोधन छोटे व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसके तहत अब पोस्ट सेल पर सप्लायर को केवल नोट जारी करना होगा और अनुबंध की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इस बदलाव से कठिनाइयां दूर होंगी और सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इनवॉइस में अधिक वैल्यू दिखाने, माल की वापसी या सप्लाई में कमी पाए जाने पर टैक्सेशन में सीधा उल्लेख नहीं हो पाता, जिससे विवाद की स्थिति बनती है। अब पोस्ट सेल डिस्काउंट की धारा जोड़ी जा रही है, जिससे क्रेडिट नोट के आधार पर काम हो सकेगा। क्रेडिट नोट एक साल के लिए जारी किया जा सकेगा और यह रिफंड से संबंधित होगा। देवड़ा ने जानकारी दी कि पहले ₹10 लाख के रिफंड में से ₹9 लाख का रिफंड 60 दिन में प्राप्त होता था, जो अब 7 दिन में मिलेगा। इसके अतिरिक्त, ₹1000 के रिफंड भी अब स्वीकृत किए जाएंगे, जिससे छोटे व्यापारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
कैलाश विजयवर्गीय पर 'कीड़ा' टिप्पणी का आरोप
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय पर युवाओं को ‘कीड़ा’ कहने का आरोप लगाया। इस आरोप पर कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष से बात की और बताया कि अध्यक्ष ने पूरा वीडियो देखा है। विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने युवाओं को ‘कीड़ा’ नहीं कहा और नेता प्रतिपक्ष का माफी मांगना उनके विवेक पर निर्भर करता है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कैलाश विजयवर्गीय का समर्थन करते हुए कहा कि समझने में गलती हुई है और आरोप लगाने वाले “कॉकरोच पार्टी से मिल गए हैं”। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के पोस्टर का जिक्र करते हुए कहा कि उस पर ‘संविधान मुरादाबाद’ लिखा था, जो उनका असली चेहरा है। उमंग सिंघार ने इस मामले में भाजपा सदस्यों के चुप रहने पर सवाल उठाया और कहा कि उनके पास सबूत है, उन्होंने पोस्टर भी सदन में फोटो के साथ दिखाया। सिंघार ने छात्रों को ‘कॉकरोच’ कहे जाने की जांच कराने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कई बार वरिष्ठ सदस्यों से चूक होती है, जो नहीं होनी चाहिए और सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए। अध्यक्ष ने कैलाश विजयवर्गीय की प्रोसीडिंग देखने के बाद कहा कि ‘कीड़ा’ या ‘कॉकरोच’ शब्द का प्रयोग नहीं होना चाहिए था। भाजपा विधायक प्रह्लाद पटेल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष से गलती हुई है और उन्हें इसे मानना चाहिए। इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा है। राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि इंदौर में कुछ छात्र कैलाश विजयवर्गीय के घर पहुंच गए थे, जिससे उनकी राजनीतिक छवि धूमिल होती है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने टिप्पणी की कि झूठ बोलने से आंदोलन भड़क सकता है, जो बेहद जरूरी है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस पर खंडन आने की मांग की। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष से कोई अपेक्षा नहीं है और न ही वे खेद प्रकट करें। विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि उन्होंने रिकॉर्ड देखा है, इसलिए वे बताएं कि सच क्या है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पुष्टि की कि उन्होंने रिकॉर्ड देखा है और कैलाश विजयवर्गीय के मुंह से ‘कीड़ा’ शब्द नहीं निकला।
स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास और विस्तार
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सदन में कहा कि क्षेत्र में विकास हो रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था को बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कॉलेज खोलने पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि शोध और नवाचार जैसे कई महत्वपूर्ण काम होते हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि 13 जिलों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर मेडिकल कॉलेज लाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद कॉलेजों की संख्या 7 से बढ़कर 15 हो गई है और होम्योपैथिक कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। शुक्ला ने कहा कि समस्याओं के समाधान के बजाय पहले से जिम्मेदारी लेनी होगी और पहले से इंतजाम करने चाहिए। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज और सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 5200 सीटें हैं, जिन्हें आने वाले समय में 10 हजार और पीजी की 2 हजार से ज्यादा सीटें करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना, एडमिशन की संख्या को बेहतर बनाना और शोध को बढ़ावा देना है।
पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन विधेयक पारित
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन विधेयक 2026 विधानसभा में पारित हो गया है।
उच्च शिक्षा में सुधार और निजी विश्वविद्यालय
मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विधेयक में किया जा रहा संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के मानकों को पूरा करने के लिए है। इसका उद्देश्य निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने और निवेश करने के इच्छुक संस्थानों को अधिक सरल और अनुकूल व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सदन में एक सदस्य ने टांटिया मामा भील विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जारी है और अगले दो महीने में इसे पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी नए विश्वविद्यालय को पूरी तरह स्थापित होने में स्वाभाविक रूप से चार से पांच वर्ष का समय लगता है। प्रवेश प्रक्रिया को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार ने नई नीति बनाई है और पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक अधिक प्रवेश हुए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की कोशिश है कि 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाए, ताकि शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो और परीक्षाएं भी निर्धारित समय पर आयोजित की जा सकें। मंत्री ने कहा कि सरकार डिजिटल वैल्यूएशन प्रणाली को तेजी से लागू कर रही है, ताकि उत्तर पुस्तिकाएं समय पर मूल्यांकनकर्ताओं तक पहुंचें और परिणाम भी समय पर घोषित किए जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र लीक होने की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। जहां पहले शिकायतें मिलती थीं, वहां व्यवस्थाओं में सुधार किया गया है। परमार ने बताया कि ₹5 करोड़ की सुरक्षा निधि का भी प्रावधान किया जा रहा है, ताकि यदि भविष्य में कोई निजी विश्वविद्यालय बंद होता है तो वहां अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता को कम किया जा रहा है, लेकिन आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त भूमि का प्रावधान रखा जाएगा।
यूसीसी और छात्र मुद्दों पर हंगामे के बाद सदन स्थगित
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश शासन से संबंधित नहीं है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा नहीं होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पर चर्चा हो सकती है, लेकिन प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े विषय पर चर्चा नहीं हो सकती। इस दौरान भाजपा सदस्यों ने कहा कि आसंदी द्वारा व्यवस्था दिए जाने के बावजूद कांग्रेस उसका पालन नहीं कर रही है, जो आसंदी का अपमान है। उमंग सिंघार ने कहा, “छात्रों को कीड़े-मकोड़े और अराजक तक कहा गया। माननीय मुख्यमंत्री यूसीसी पर चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन छात्रों के भविष्य पर बात नहीं करना चाहते।” इस हंगामे के बीच विधानसभा 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
