बुलंद सोच, नीमच।

न्यायालय ने पिकअप से घसीटकर काना उर्फ कन्हैयालाल भील की हत्या के आरोप में एक आरोपित को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और अर्थदंड भी लगाया है। इस प्रकरण में आठ आरोपितों को दोष मुक्त किया गया।
चर्चित, चिन्हित, जघन्य और सनसनीखेज प्रकरण में न्यायालय ने करीब पांच साल बाद विचारण उपरांत यह फैसला सुनाया है। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी कीर्ति शर्मा ने बताया कि यह निर्णय एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश नीमच आलोक कुमार सक्सेना ने सुनाया है।
न्यायालय ने आरोपित छीतर पुत्र जयराम गुर्जर, आयु 36 वर्ष, निवासी ग्राम पाटन सिंगोली को काना उर्फ कन्हैयालाल भील की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और एक हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी कीर्ति शर्मा ने बताया कि यह घटना 26 अगस्त 2021 को नीमच-सिंगोली रोड पर अथवा कलां फंटे पर हुई थी।
काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ बाइक पर बैठकर अपनी पत्नी को तलाश कर रहा था। इस तलाश में बाणदा, जेतलिया होते हुए नीमच-सिंगोली रोड स्थित अथवा कलां फंटे पर पहुंचा और हाथों में पत्थर लेकर आने-जाने वाले वाहनों को रोककर पूछताछ कर रहा था।
इसी दौरान सुबह करीब 6 बजे छीतर गुर्जर बाइक से आया और काना भील को टक्कर मार दी थी। टक्कर से काना भील सड़क पर गिर गया था और उसके सिर में गंभीर चोट आई थी।
इसके बाद छीतर ने काना से मारपीट भी की थी। काना का साथी गोविंद सेन डरकर मौके से ग्राम डाबी चला गया था।
बाद में जानकारी मिली थी कि काना की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बाद में सामने आया था कि काना भील को रस्सी से पिकअप के पीछे बांधकर घसीटा भी गया था, जिसके वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुए थे।
सिंगोली पुलिस ने तत्कालीन जावद एसडीओपी अजीत तिवारी के निर्देशन में अनुसंधान कर प्रकरण का चालान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिस पर विचारण उपरांत न्यायालय ने एक आरोपित छीतर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थ दंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कीर्ति शर्मा व अशोक कुमार सोनी ने की है। पुलिस ने इस प्रकरण को चर्चित, चिन्हित, जघन्य और सनसनीखेज प्रकरण के रूप में शामिल किया था।
महेंद्र पुत्र रामचंद्र गुर्जर, आयु 41 वर्ष, निवासी ग्राम जेतलिया; लोकेश पुत्र नारायण, आयु 25 वर्ष, निवासी सिंगोली; गोपाल पुत्र लालू गुर्जर, आयु 42 वर्ष, निवासी ग्राम पाटन; लक्ष्मण पुत्र जयराम गुर्जर, आयु 31 वर्ष, निवासी ग्राम पाटन; अमरचंद पुत्र गोपी गुर्जर, आयु 64 वर्ष, निवासी ग्राम जेतलिया; धीरज पुत्र उंकारलाल धाकड़, आयु 36 वर्ष, निवासी ग्राम चल्दू; पारस गुर्जर और सत्यनारायण उर्फ सत्तू पुत्र हरिकिशन गुर्जर, आयु 46 वर्ष, निवासी ग्राम पाटन को दोष मुक्त किया गया।
26 अगस्त 2021 में काना उर्फ कन्हैयालाल भील की मौत का मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठा था। आरोपितों द्वारा काना भील से मारपीट और रस्सी से बांधकर पिकअप से घसीटने के वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुए थे।
इस घटना को दलित पर अत्याचार के रूप में निरूपित कर जयस सहित अन्य संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। बाणदा से लेकर सिंगोली और नीमच तक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
मामले में आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी पुरजोर तरीके से उठी थी। इसके बाद पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को समझा और चर्चित, चिन्हित, जघन्य और सनसनीखेज प्रकरण के रूप में इसे चुनकर जांच की। आरोपितों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। प्रकरण में पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक भी नियुक्त किए गए थे।
मनासा में घर में घुसकर हमला
मनासा तहसील के ग्राम मालाहेड़ा में बीती रात्रि करीब 12 बजे घर के हॉल में सो रहे सूरजमल बंजारा पर करीब चार अज्ञात बदमाशों ने अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने सूरजमल की छाती पर बैठकर उनके कान में पहने सोने के झेले खींच लिए और मौके से फरार हो गए।
अचानक कान से सोने के झेले खींचने से कान का मांस फट गया, जिससे सूरजमल बंजारा गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपचार के बाद उन्होंने मनासा थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई। रात्रि के समय घर में घुसकर हुई इस वारदात से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है।

