बुलंद सोच,।
श्रावण माह की शुरुआत होते ही विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है।
मान्यता है कि जो भक्त श्रावण सोमवार का व्रत रखकर बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन करते हैं, उनके जन्म-जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शाम 5 बजे भगवान का स्नान होने के बाद जलाभिषेक बंद कर दिया जाता है।
इसके बाद विशेष श्रृंगार कर बाबा महाकाल राजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
शाम 7 बजे संध्या आरती होती है, जिसमें दूध का भोग लगाया जाता है।
रात 10:20 बजे शयन आरती के दौरान मेवे का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
इसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि एक से लेकर एक लाख तक बिल्व पत्र अर्पित करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है और इससे अनेक यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
उनके अनु, श्रावण माह में किए जाने वाले अधिकांश व्रत माता सती और माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने तथा उन्हें पति रूप में प्राप्त करने के लिए किए थे।

