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2026-08-14

मध्य प्रदेश कॉलेज चुनाव में जयस की एंट्री, त्रिकोणीय मुकाबला

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मध्य प्रदेश की कॉलेज राजनीति में अब तक मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के बीच देखा जाता रहा है। हालांकि, इस बार के छात्रसंघ चुनाव में स्थिति बदलने वाली है, क्योंकि जयस की छात्र विंग जयस छात्र संगठन (जेसीएस) भी सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

संगठन ने राज्य के सभी महाविद्यालयों में अपने उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बनाई है। इसके लिए विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के युवाओं को चुनावी टिकट देने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ के चुनाव आयोजित किए जाने की तैयारी चल रही है।

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आदिवासी बहुल संस्थानों पर प्रभाव

जयस संगठन की छात्र राजनीति में इस नई पहल से उन सभी शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं, जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है।

अब तक इन युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए केवल दो मुख्य संगठनों के मध्य प्रतिस्पर्धा रहती थी। जयस के प्रत्यक्ष रूप से चुनावी रण में आ जाने से इन दोनों ही स्थापित छात्र संगठनों के समक्ष आदिवासी छात्र-छात्राओं के बीच अपनी साख और प्रभाव को बनाए रखने की एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

चुनावी घोषणा और अभियान

संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख लोकेश मुजाल्दा ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अमर उजाला से बातचीत में स्पष्ट किया कि जयस अब परिसरों और कॉलेजों के भीतर भी आम विद्यार्थियों की बुलंद आवाज बनेगा तथा आगामी छात्रसंघ चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगा।

इसके साथ ही संगठन के प्रदेश प्रमुख बाबूलाल बघेल ने जानकारी दी कि उनका दल राज्य के प्रत्येक कॉलेज में मजबूती से चुनाव लड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके लिए अतिशीघ्र कॉलेज स्तर पर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद और संपर्क अभियान आरंभ किया जाएगा।

संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के महाविद्यालयों का दौरा करेंगे, क्योंकि इन अंचलों में आदिवासी छात्र-छात्राओं की बहुलता है। यहां विद्यार्थियों के साथ आमने-सामने चर्चा करके उनकी शैक्षणिक समस्याओं और स्थानीय प्राथमिकताओं को समझा जाएगा।

इसके उपरांत राज्य के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार का व्यापक अभियान संचालित होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जयस पूरे प्रदेश में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा और छात्रसंघ चुनाव की तैयारी लंबे समय से जारी है। संगठन को विश्वास है कि जिस भी कॉलेज में आदिवासी छात्र अध्ययनरत हैं, वहां पहुंचकर उनसे संपर्क साधा जाएगा और जीत हासिल होगी।

चुनावी रणनीति और मुद्दे

जयस की संपूर्ण चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु आदिवासी विद्यार्थी ही रहेंगे। राज्य के अनेक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आदिवासी समाज के छात्र बड़ी संख्या में नामांकित हैं और संगठन इन्हीं परिसरों में अपना जनाधार मजबूत करने में जुटा है।

छात्रवृत्ति, रोजगार के नए अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार, बैकलॉग पदों की पूर्ति और कॉलेजों की स्थानीय समस्याओं को इस पूरे अभियान में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

छात्र राजनीति में प्रवेश से पूर्व भी जयस युवाओं के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाता रहा है। सरकार से संगठन की प्रमुख मांगों में बैकलॉग के खाली पदों पर शीघ्र भर्ती और पटवारी परीक्षा में ऋणात्मक अंकन प्रणाली को समाप्त करना शामिल है। इंदौर और भोपाल समेत कई प्रमुख नगरों में संगठन इन विषयों को लेकर पूर्व में भी प्रदर्शन कर चुका है। अब इन मुद्दों को सीधे विद्यार्थियों के बीच ले जाया जाएगा।

संगठन का इतिहास और चुनाव की संभावना

राज्य के कॉलेजों में वर्षों से दो प्रमुख संगठनों का वर्चस्व रहा है, जो छात्र राजनीति के माध्यम से अपना कैडर तैयार करते रहे हैं। जयस के आगमन से पहली बार एक तीसरा सशक्त विकल्प उभरेगा, जिसका सबसे व्यापक प्रभाव आदिवासी बहुल जिलों के परिसरों में देखने को मिल सकता है।

जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी। यह संगठन लंबे समय से सामाजिक एवं युवा मुद्दों पर कार्य कर रहा है। छात्र राजनीति का संचालन करने के लिए लगभग दो वर्ष पूर्व एक समर्पित छात्र इकाई का निर्माण किया गया था।

राज्य में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। अब सितंबर माह में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की तैयारी है, यद्यपि अधिकृत तिथियों की घोषणा होना अभी शेष है।