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2026-08-07

मध्य प्रदेश में 56% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त, 24 चिकित्सक संचालनालय में पदस्थ

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आधे से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली हैं, जबकि कई विशेषज्ञ वर्षों से स्वास्थ्य संचालनालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। इससे जिला अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 4,573 स्वीकृत पदों में से 2,581 पद (56.44%) रिक्त हैं। वहीं, स्वास्थ्य संचालनालय (डीएचएस) में 24 विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थ हैं, जिनमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ पिछले 25 वर्षों से संचालनालय में ही कार्यरत हैं।

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प्रदेश के जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन और शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं मिल पा रहे हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण कई अस्पतालों में ऑपरेशन टालने पड़ते हैं और मरीजों को मेडिकल कॉलेजों में रेफर किया जा रहा है।

इसके बावजूद, अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक बड़ा हिस्सा मुख्यालय में प्रशासनिक कार्यों में संलग्न है। जिन विषयों के विशेषज्ञों की सर्वाधिक आवश्यकता जिला अस्पतालों में है, उन्हीं विषयों के डॉक्टर मुख्यालय में कार्यरत हैं।

रिक्त पदों का विषयवार विवरण

प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट के 150 में से 128 पद (85.33%) रिक्त हैं। दंत विशेषज्ञ के 87 में से 66 पद (75.86%) खाली हैं।

सर्जरी विशेषज्ञ के 631 में से 437 पद (69.25%) और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के 644 में से 441 पद (68.48%) खाली पड़े हैं।

मेडिकल विशेषज्ञ के 682 में से 454 पद (66.57%) तथा शिशु रोग विशेषज्ञ के 857 में से 463 पद (54.03%) रिक्त हैं।

संचालनालय में पदस्थ विशेषज्ञ

संचालनालय में पदस्थ डॉक्टरों की सूची के अनुसार, डॉ. अर्चना मिश्रा, डॉ. प्रज्ञा तिवारी और डॉ. राजश्री बजाज (तीनों स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रभाकर तिवारी (शिशु रोग विशेषज्ञ), डॉ. रूबी खान (पैथोलॉजिस्ट), डॉ. अर्चना पुंडीर (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. शरद तिवारी (प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ), डॉ. आदर्श महेश शुक्ल (एनाटॉमी विशेषज्ञ) कार्यरत हैं।

अन्य विशेषज्ञों में डॉ. हर्ष राय (शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ), डॉ. संजय खरे (मेडिकल विशेषज्ञ), डॉ. योगेश कौर और डॉ. हेमेंद्र सिंह कदम (ईएनटी विशेषज्ञ), डॉ. प्रतिभा अहिरवार (दंत रोग विशेषज्ञ), डॉ. सौरभ कुमार (प्रिवेंटिव मेडिसिन) शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, डॉ. राहुल सिंह भदौरिया और डॉ. तेज बहादुर सिंह (दोनों ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन), डॉ. राजू निदारिया (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ), डॉ. शिरीष रघुवंशी (महिला रोग विशेषज्ञ), डॉ. स्मृति सिंह और डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव (दोनों प्रिवेंटिव मेडिसिन), डॉ. नितिन पटेल (रेडियोलॉजिस्ट) और डॉ. बी.एल. यादव (शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ) भी संचालनालय में पदस्थ हैं। इनमें से कुछ प्रशासनिक कैडर में आ गए हैं।

भर्ती प्रक्रिया और सेवाओं पर प्रभाव

सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती कर रही है, किंतु रिक्त पदों की तुलना में भर्ती की गति काफी धीमी है। नियमित भर्ती, बॉन्ड और एनएचएम के माध्यम से कुल 1,992 विशेषज्ञ ही उपलब्ध हैं, जबकि 2,581 पद अब भी खाली हैं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण जिला अस्पतालों में कई सेवाएं प्रभावित हैं। प्रसूति ऑपरेशन, गंभीर सर्जरी, एक्स-रे और सीटी स्कैन की रिपोर्टिंग, बच्चों के गंभीर उपचार और आपातकालीन सेवाओं के लिए मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर है।

विभाग का पक्ष

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टर और डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में भर्ती को प्राथमिकता दी जा रही है। संचालनालय में विशेषज्ञ डॉक्टरों के काम करने के संबंध में जानकारी लेकर ही वह कुछ बता पाएंगे।