BREAKING NEWS
2026-08-07

रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की सबसे लंबी डाक कांवड़ यात्रा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर के विजय नगर क्षेत्र स्थित बावड़ी वाले बालाजी मंदिर द्वारा एक डाक कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा तमिलनाडु के रामेश्वरम से 2100 किलोमीटर का सफर नॉन-स्टॉप तय कर इंदौर पहुंचेगी। इस सावन में रामेश्वरम से इंदौर तक की यह डाक कांवड़ यात्रा सबसे लंबी होगी।

कांवड़ यात्री 10 अगस्त सोमवार को रामेश्वरम पहुंचेंगे। यह सुपर फास्ट कांवड़ यात्रा 15 अगस्त से आरंभ होगी, जिसके 21 अगस्त तक इंदौर पहुंचने की संभावना है।

Advertisement

इस यात्रा में लगभग 300 कांवड़ यात्री शामिल होंगे। यह यात्रा 171 घंटे यानी सात दिन में पूरी होगी। कांवड़ यात्रा प्रति घंटे बारह किलोमीटर की गति से चलेगी।

यात्रा का इतिहास और व्यवस्थाएं

इस डाक कांवड़ यात्रा का सिलसिला वर्ष 2015 से आरंभ हुआ था। मंदिर के महंत रामजी महाराज इस यात्रा के प्रेरणा स्रोत हैं, और उन्हीं के मार्गदर्शन में डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जाती है।

महंत रामजी महाराज का कहना है कि युवा भक्तों की टोली डाक कांवड़ में शामिल रहती है, जो तय दूरी तक कांवड़ लेकर दौड़ती है। कांवड़ यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है। डाक कांवड़ यात्रा 11 से 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर बड़े वाहन नहीं जा पाएंगे, और कांवड़ियों के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं।

पूर्व में निकाली गई यात्राएं

बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति द्वारा अब तक पांच डाक कांवड़ यात्राएं निकाली जा चुकी हैं।

इनमें वर्ष 2025 में अयोध्या से इंदौर तक 1100 किलोमीटर, वर्ष 2024 में द्वारका से इंदौर तक 1100 किलोमीटर, वर्ष 2023 में गंगोत्री धाम से इंदौर तक 1500 किलोमीटर, वर्ष 2022 में अमरकंटक से इंदौर तक 900 किलोमीटर और वर्ष 2021 में ओंकारेश्वर से इंदौर तक 90 किलोमीटर की डाक कांवड़ यात्राएं शामिल हैं। इस वर्ष अभी तक की सबसे लंबी दूरी की डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जा रही है।

यात्रियों के अनुभव और कांवड़ के प्रकार

डाक कांवड़ से आरंभ से जुड़े सुनील भिड़े और अनिल यादव का कहना है कि सीताराम जी महाराज द्वारा काफी अच्छा इंतजाम किया जाता है। कांवड़ यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं रहती है, और उनकी सुविधाओं का पूर्ण ध्यान रखा जाता है।

सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है, जहां पवित्र नदियों से जल पात्रों में भरकर कंधों पर कांवड़ लेकर यात्री भोलेनाथ को जल अर्पण करते हैं। सावन के महीने में कांवड़ का और शिव मंदिरों में जल अर्पण का प्राचीन काल से खास महत्व है, जो हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। मालवा और निमाड़ में नर्मदा से जल लेकर कांवड़ यात्री उज्जैन महाकालेश्वर आते हैं।

कांवड़ यात्रा चार प्रकार की होती है। सामान्य कांवड़ यात्रा में कांवड़ यात्री नदी से कांवड़ में जल भरकर शिव को अर्पित करते हैं, जिसमें कांवड़ जमीन पर नहीं रखी जाती, बल्कि रात्रि विश्राम के वक्त स्टैंड पर रखी जाती है। खड़ी कांवड़ यात्रा में यात्री खड़ी कांवड़ लेकर चलते हैं और मुख्य कांवड़ यात्री की मदद के लिए अन्य साथी रहते हैं। दंडवत कांवड़ यात्रा में जल लेकर यात्री गंतव्य स्थान तक दंडवत करते हुए जाता है। डाक कांवड़ यात्रा में यात्री जल लेकर दौड़ते हुए जल अर्पण के लिए पहुंचते हैं।