बुलंद सोच, भिवंडी।
महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में पुलिस ने सोलापुर के एक भर्ती प्रशिक्षण केंद्र के मालिक प्रकाश पवार को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। भिवंडी पुलिस के मुताबिक, पवार के पास से परीक्षा से जुड़े 26 पेपर सेट मिले हैं। इनमें से छह पेपर सेट सीधे टीईटी परीक्षा से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन पेपरों का इस्तेमाल लीक सामग्री को अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के लिए किया गया था या नहीं।
प्रकाश पवार पर आरोप और पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, प्रकाश पवार सोलापुर के रहने वाले हैं और करीब एक दशक से सरकारी नौकरी तथा शिक्षक पदों की तैयारी कराने वाला प्रशिक्षण केंद्र चलाते रहे हैं। जांच के दौरान पेपर लीक नेटवर्क में उनकी भूमिका सामने आने के बाद भिवंडी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। तलाशी में 26 परीक्षा से जुड़े पेपर सेट मिले। पुलिस का कहना है कि इनमें ज्यादातर भर्ती परीक्षाओं के मॉक टेस्ट से संबंधित हैं, लेकिन कम से कम छह सेट टीईटी परीक्षा से सीधे जुड़े हैं। स्थानीय अदालत ने पवार को 15 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस की आगे की जांच
जांच अधिकारी जब्त किए गए दस्तावेजों, फोन रिकॉर्ड और प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए थे या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पवार तक ये परीक्षा सामग्री किस रास्ते से पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कोई अतिरिक्त एजेंट या परीक्षा से जुड़ा अंदरूनी व्यक्ति शामिल था या नहीं। पुलिस ने आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया है।
वकील का बचाव और अकादमी का विवरण
पवार के वकील नारायण अय्यर ने अपने मुवक्किल पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि पवार एक समर्पित शिक्षक हैं और उन्होंने गरीब तथा वंचित वर्ग के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए वर्षों तक काम किया है। वकील के मुताबिक, जिस आरोपी के पास से 26 पेपर मिले थे, उनमें 20 पुलिस भर्ती की तैयारी कराने वाले छात्रों से जुड़े थे और पांच से छह पेपर कई साल पहले हुई टीईटी परीक्षाओं से संबंधित थे। पवार ने बीए और डीएड की पढ़ाई की है और पहले शिक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं। पवार के वकील के अनुसार, उन्होंने सोलापुर में अपनी सात एकड़ जमीन पर ध्रुव अकादमी शुरू की थी। यह संस्थान 2012 से 2020 तक चला और इसमें कक्षा सी तथा डी स्तर की सरकारी नौकरियों, पुलिस कांस्टेबल और निचले स्तर के क्लर्क पदों की परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी। वकील के अनुसार, प्रशिक्षण के लिए छात्रों से पहले फीस नहीं ली जाती थी। उनसे सफलता मिलने और नौकरी हासिल करने के बाद मामूली शुल्क लिया जाता था। करीब आठ से दस साल में लगभग एक हजार अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण लिया और इनमें 500 से अधिक सफल हुए।
टीईटी पेपर लीक मामले की शुरुआत
मामला 27 जून को सामने आया था। भिवंडी पुलिस ने गोपनीय सूचना के आधार पर एक जगह छापा मारकर अनधिकृत प्रश्नपत्रों की प्रतियां बरामद की थीं। बाद में महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के अधिकारियों से इनकी जांच कराई गई तो बरामद सामग्री 28 जून को होने वाली टीईटी परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाती पाई गई। इसके बाद राज्य सरकार ने टीईटी 2026 परीक्षा स्थगित कर दी। भिवंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
कुल गिरफ्तारियां और मुख्य आरोपी
पुलिस ने इस मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। जुलाई के अंत में कथित मास्टरमाइंड और उसके एक सहयोगी को बिहार से पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक, कथित सरगना विजयेंद्रकुमार उर्फ बिजेंद्र कुमार गुप्ता और उसका सहयोगी इंद्रजीत सिंह बिहार के समस्तीपुर से गिरफ्तार किए गए थे। अब सोलापुर के प्रशिक्षण केंद्र संचालक प्रकाश पवार की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक नेटवर्क में अलग-अलग आरोपियों की क्या भूमिका थी।

