बुलंद सोच, मल्हारगढ़।
शासन द्वारा सांदीपनि सीएम राइज स्कूल की परिकल्पना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई है। हालांकि, छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को तीन किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल आना पड़ रहा है।
मल्हारगढ़ से तीन किलोमीटर दूर नारायणगढ़ मार्ग पर महाविद्यालय के पास स्थित अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास में सांदीपनि सीएम रााइज स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 30 छात्र रहते हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि प्रतिदिन छात्रावास के सामने से बस निकलती है, लेकिन उन्हें नहीं बैठाया जाता है। जबकि कन्या छात्रावास की बालिकाओं को बसें लेने भी आती हैं और छोड़ने भी जाती हैं।
इस व्यवस्था के कारण छात्रों को प्रतिदिन तीन किलोमीटर स्कूल आने और तीन किलोमीटर वापस जाने का सफर पैदल ही तय करना पड़ता है, जिससे उनके स्कूल आने-जाने में ही दो घंटे खराब हो रहे हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी हो रहा है।
पैदल सफर के दौरान विद्यार्थियों को हादसों का भी डर लगा रहता है। उन्हें मल्हारगढ़ बस स्टैंड पर फोर लेन मार्ग भी पार करना पड़ता है, जिसमें काफी भय बना रहता है। इसके अतिरिक्त, बारिश के मौसम में उनके स्कूल बैग और किताबें भीगकर खराब हो रही हैं।
कक्षा 9वीं के छात्र अजय डामोर ने बताया कि स्कूल जाने के लिए बस की सुविधा नहीं है, इसलिए उन्हें पैदल आना-जाना पड़ता है। बारिश से उनके बैग, पुस्तकें व कॉपियां खराब होने का खतरा बना रहता है और वे खुद भी गीले हो जाते हैं।
कक्षा 11वीं के छात्र शंकर ने कहा कि स्कूल जाने के लिए कोई साधन नहीं है और बसें भी नहीं आती हैं, जिसके कारण उन्हें पैदल ही आना-जाना करना पड़ता है और हमेशा हादसे का डर लगा रहता है।
कक्षा 9वीं के छात्र सुभाष मेड़ा ने बताया कि स्कूल जाने के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें एक घंटे पहले निकलना पड़ता है। आने-जाने में दो घंटे व्यर्थ हो रहे हैं, उन्हें कोई साधन नहीं मिलता और काफी परेशानी हो रही है।
कांग्रेस के जिला महासचिव अनिल शर्मा ने इस स्थिति को छात्रों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य बच्चों के दो घंटे व्यर्थ ही बर्बाद हो रहे हैं और उन्हें शारीरिक कष्ट भी हो रहा है, इसलिए प्रशासन को इन छात्रों के लिए तत्काल बस सेवा उपलब्ध करानी चाहिए।
सांदीपनि विद्यालय, मल्हारगढ़ के प्राचार्य अशोक वाघेला ने स्वीकार किया कि छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए बस की व्यवस्था नहीं रहती है क्योंकि अभी जो बस आ रही है उसमें विद्यार्थियों के लिए जगह नहीं रहती। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक-दो दिन में एक अन्य बस की व्यवस्था की जाएगी जिसमें विद्यार्थी आना-जाना कर सकेंगे।

