बुलंद सोच, जयपुर।
जयपुर मेट्रो की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने लगभग 12 वर्ष पुराने बहुचर्चित मामले में मध्यप्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा को दोषी ठहराते हुए दुष्कर्म के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत करने के मामले में उन्हें तीन वर्ष के कारावास से भी दंडित किया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी मध्यप्रदेश पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर तैनात था, जिसकी जिम्मेदारी आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी। इसके विपरीत, उसने पीड़िता के जेल में बंद पति की मदद कराने का झांसा देकर अपने पद का दुरुपयोग किया और उसे अलग-अलग शहरों में ले जाकर कई बार दुष्कर्म किया।
विशेष लोक अभियोजक संदीप वाजपेयी और पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता मुकेश पाठक ने अदालत को बताया कि पीड़िता ने 11 जुलाई 2014 को महिला थाना दक्षिण, जयपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, फरवरी 2012 में मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में उसके पति के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था। पति के कहने पर वह मार्च 2012 में भोपाल में तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा से मिली।
आरोप है कि मिश्रा ने पति की कानूनी मदद का भरोसा दिलाकर ऑफिसर्स मैस में उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने पीड़िता से कई बार अपने बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर कराए और बाद में जोधपुर, मुंबई सहित अन्य स्थानों पर ले जाकर भी उसके साथ दुष्कर्म किया।
इसके अलावा, अप्रैल 2014 में उसने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत की।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर विशेष अदालत ने अनिल मिश्रा को दोषी पाया।

