बुलंद सोच, जबलपुर।
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा है कि बेंच हंटिंग जैसी प्रवृत्ति न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर सीधा प्रहार है। इसी के साथ कोर्ट ने ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अधिवक्ता राजकुमार मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के लिए शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि सुनवाई के दौरान अधिवक्ता बदलने का कदम न्यायाधीश बदलवाने के उद्देश्य से उठाया गया प्रतीत होता है। कोर्ट ने दोनों को 5 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
मामले का विवरण
यह मामला ग्वालियर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित की याचिका से जुड़ा है, जिसमें जीडीए के 28 जनवरी, 2023 के उस आदेश को चुनौती दी गई है। जीडीए के इस आदेश के तहत संस्था के साथ हुए अनुबंध समाप्त कर 663 प्लाटों के नामांतरण निरस्त कर दिए गए थे। इस आदेश पर हाई कोर्ट पहले ही अंतरिम रोक लगा चुका है।
अधिवक्ता बदलने पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जीडीए की ओर से पहले से वरिष्ठ अधिवक्ता रिकार्ड पर होने के बावजूद, बीच सुनवाई में नया वकालतनामा दाखिल कर अधिवक्ता राजकुमार मिश्रा को जोड़ा गया। कोर्ट ने कहा कि इसका कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी की बिना शर्त माफी भी कोर्ट ने स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने निर्देश दिए कि दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, इस संबंध में शोकाज नोटिस जारी किया जाए।
