BREAKING NEWS

एमपी हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना व्यावसायिक मृत्यु के समान

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

हाई कोर्ट की पांच जजों की वृहद पीठ ने सरकारी ठेकों और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की शक्तियों के संबंध में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली इस पीठ ने स्पष्ट किया है कि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान है।
कोर्ट ने माना कि ब्लैकलिस्टिंग के कारण व्यवसाय और साख को होने वाली गैर-मौद्रिक क्षति का पैसों में आकलन नहीं किया जा सकता।
इस कारण, यह विषय मध्य प्रदेश मध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983 के पंचाट (अधिकरण) के क्षेत्राधिकार से पूरी तरह बाहर है।
ऐसे मामलों में, संयुक्त आदेश के बावजूद प्रभावित ठेकेदार सीधे हाई कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता है।

Advertisement

मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज का मामला

एडवोकेट विवेक रंजन पांडे ने अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ बताया कि मूल मामला मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज का है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 30 अक्टूबर 2020 को एक आदेश जारी कर फर्म का अनुबंध रद्द कर दिया था और उसे तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
फर्म ने विभाग की इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

ब्लैकलिस्ट करने के अधिकार क्षेत्र पर स्पष्टीकरण

कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के वर्ष 2015 के परिपत्र का हवाला देते हुए एक अन्य महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था भी दी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार केवल मुख्य अभियंता या उनके समकक्ष अधिकारी के पास ही सुरक्षित है।
अनुबंध के तहत अन्य सक्षम या अपीलीय प्राधिकारी केवल मुख्य अभियंता को सिफारिश भेज सकते हैं, लेकिन स्वयं ब्लैकलिस्टिंग का आदेश पारित नहीं कर सकते।