बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सीहोर के एक वनरक्षक की याचिका पर राज्य शासन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, पीठ ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि में वनपाल पद पर कोई पदोन्नति आदेश जारी किया जाता है, तो वह इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
याचिकाकर्ता संतोष कुमार साहू की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत किया।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता संतोष कुमार साहू 30 सितंबर 2008 से वनरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। विभाग ने 21 जुलाई 2025 और 1 अप्रैल 2026 को जारी वरिष्ठता सूचियों में उन्हें उनके कनिष्ठ कर्मचारियों से नीचे दर्शाया। याचिकाकर्ता की आपत्ति को 10 जुलाई 2026 को निरस्त कर दिया गया, जिसके उपरांत कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि पदोन्नति का आधार वरिष्ठता-सह-योग्यता होना चाहिए। हालांकि, विभाग ने योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर निर्णय लेते हुए वर्ष 2008 की भर्ती की मेरिट सूची को आधार बनाया है। याचिका के अनुसार, इस प्रक्रिया से मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 का उल्लंघन हुआ है और याचिकाकर्ता के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।

