बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत लगभग 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं। यह आंदोलन स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ है और अब इसका स्वरूप व्यापक होता जा रहा है। मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन 9 जुलाई 2026 से लगातार जारी है, जो पिछले कुछ दिनों से काम बंद और अनिश्चितकालीन हड़ताल के रूप में और तेज हो गया है। प्रदेश के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल सहित सभी 13 शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स ने बीते शनिवार से काम बंद कर आंदोलन शुरू किया।
स्टाइपेंड वृद्धि की मुख्य मांग
एमबीबीएस इंटर्न्स की मुख्य मांग वर्तमान मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह किया जाना है। इंटर्न्स का कहना है कि वे अस्पतालों में दिन-रात 24-24 घंटे की कठिन ड्यूटी करते हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि वर्तमान स्टाइपेंड उनकी मेहनत और आज की महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। उनका यह भी कहना है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके काम के सम्मान और उचित पारिश्रमिक की भी है।
शासन से वार्ता और डॉक्टरों की शर्त
‘वॉइस ऑफ इंटर्न्स, मध्य प्रदेश’ के प्रतिनिधिमंडल ने चिकित्सा शिक्षा आयुक्त से मुलाकात की है। अधिकारियों ने स्टाइपेंड में लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि का मौखिक आश्वासन दिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय मांगा। प्रतिनिधि डॉ. रितिक गुप्ता और डॉ. ऋतिक शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जब तक शासन की ओर से लिखित और समयबद्ध आदेश जारी नहीं होता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह हड़ताल अगले एक महीने तक भी खिंच सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
हड़ताल के कारण अस्पतालों की नियमित ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट) और वार्ड सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि, मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं फिलहाल जारी रखी गई हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से ठोस और लिखित फैसला नहीं आता है, तो सोमवार के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे हमीदिया (भोपाल) सहित प्रदेश के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में सामान्य मरीजों की परेशानी बढ़ना तय है।
आंदोलन को मिला समर्थन
एमबीबीएस इंटर्न्स के इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर बड़ा समर्थन मिला है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूड़ा) ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे भी हड़ताल में शामिल होकर ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, जो सीनियर डॉक्टरों और प्राध्यापकों का संगठन है, ने भी सरकार से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है। ‘वॉइस ऑफ इंटर्न्स’ ने दोनों शीर्ष संस्थाओं के समर्थन पर आभार व्यक्त किया है। डॉक्टरों में भारी असंतोष है क्योंकि प्रशासन के 20 प्रतिशत मौखिक आश्वासन और एक महीने का समय मांगने के बावजूद लिखित आदेश नहीं मिला है। यदि सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जल्द कोई बीच का रास्ता नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।

