बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर और सदन के भीतर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। विधायक हाथों में तख्तियां लेकर सदन पहुंचे और विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।
विपक्ष ने नीट परीक्षा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय तक प्रभावित रही। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक बताया। कांग्रेस के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दोबारा परीक्षा कराकर राहत दी गई है।
मानसून सत्र के दौरान शिक्षा और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
दिल्ली के जंतर मंतर में युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा में हंगामा किया और स्थगन सूचना को स्वीकार करने का आग्रह किया।
कांग्रेस ने संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर युवाओं को कीड़े कॉकरोच बोलने का आरोप लगाया।
सत्ता पक्ष की ओर से विश्वास सारंग सहित अन्य मंत्रियों ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो कुछ कहा गया वह रिकॉर्ड पर है, इस बात को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ।
कांग्रेस के सभी सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य भी अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर विरोध करने लगे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि राज्य से संदर्भित न होने वाले किसी भी विषय को स्थगन के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है, और जिस घटना को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिया गया है वह राज्य से संबंधित नहीं है।
दोनों पक्षों के बीच काफी देर बहस होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि यह विषय राज्य से संबंधित नहीं है, इसलिए इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है और प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।
उधर, कांग्रेस के सदस्यों द्वारा नारेबाजी की जाती रही, जिसके चलते सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
