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2026-07-23

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में 8 साल बाद लौटेगा 30% मैनेजमेंट कोटा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नियमों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार वर्ष 2018 के मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स में संशोधन करके ‘प्रवेश नियम-2026’ लागू करने की तैयारी में है। इस नई नीति के तहत प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में लगभग आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 30 प्रतिशत ‘मैनेजमेंट कोटा’ फिर से शुरू किया जाएगा। भविष्य में इस कोटे को बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक करने का विकल्प भी खुला रखा गया है। नए मसौदे के अनुसार, 15 प्रतिशत एनआरआई (NRI) कोटा पहले की तरह बना रहेगा। बाकी बची 55 फीसदी सीटों पर सामान्य काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए प्रवेश दिया जाएगा। इस नीति का ड्राफ्ट तमिलनाडु और राजस्थान के मेडिकल एजुकेशन मॉडल का गहन अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है।

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सरकारी खजाने पर घटेगा बोझ

राज्य सरकार का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में मेधावी विद्यार्थी योजना, एससी-एसटी (SC/ST) और ओबीसी (OBC) वर्ग के छात्रों की मेडिकल फीस और स्कॉलरशिप पर सरकार को सालाना लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की सीटों पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की फीस का वहन सरकार को नहीं करना पड़ेगा। इससे राज्य सरकार को हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से काउंसलिंग के बाद निजी कॉलेजों में खाली रह जाने वाली सीटों की समस्या समाप्त होगी। इसके अतिरिक्त, जिन छात्रों को सामान्य मेरिट से सीट नहीं मिल पाती थी, उन्हें भी पढ़ाई का अवसर मिलेगा।

महंगी होगी मेडिकल पढ़ाई

प्रस्तावित नियमों के तहत मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी होने के आसार हैं। मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर भी प्रवेश केवल NEET की मेरिट और राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से ही संभव होगा। बिना नीट पास किए किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं मिलेगा। मैनेजमेंट सीटों की फीस सामान्य निजी सीटों से कई गुना अधिक रखी जाएगी। यह सरकारी कोटे की ट्यूशन फीस से लगभग तीन गुना तक ज्यादा हो सकती है। तमिलनाडु में मैनेजमेंट कोटे की सालाना फीस 40 से 56 लाख रुपये है। राजस्थान में यह फीस 28 से 30 लाख रुपये तक है। मध्य प्रदेश में अंतिम फीस का निर्धारण प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति (FRC) और एमपी पीयूआरसी (MPPURC) द्वारा किया जाएगा। इस संशोधित नीति के मसौदे को जल्द ही पहले राज्य कैबिनेट और उसके बाद विधानसभा की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।