बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
उपचुनाव में भाजपा की पराजय के उपरांत सोशल मीडिया पर आशुतोष तिवारी और उनके संबंधों को लेकर चल रही मनमुटाव तथा भीतरघात की खबरों को डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पूरी तरह भ्रामक, असत्य और निराधार बताया है।
पूर्व गृहमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी उनके अनुज (छोटे भाई) समान हैं और दोनों के मध्य 25 वर्षों पुराना पारिवारिक व आत्मीय रिश्ता है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “दतिया उपचुनाव के बाद सोशल मीडिया पर मेरे और भाजपा प्रत्याशी श्री आशुतोष जी तिवारी को लेकर जो भ्रामक और असत्य बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। आशुतोष तिवारी जी मेरे अनुज हैं। उनके प्रति मेरे मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है और आगे भी रहेगी। हमारे बीच न कभी कोई कटुता थी, न आज है।”
उन्होंने यह भी बताया कि “आज भी हमारी मुलाकात हमेशा की तरह उसी गर्मजोशी और अपनत्व के साथ हुई।”
डॉ. मिश्रा ने आशुतोष तिवारी की सराहना करते हुए कहा कि वे भाजपा के कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2003 के डबरा चुनाव से ही आशुतोष जी को एक ईमानदार कार्यकर्ता के रूप में करीब से देखा है और उन्हें पूरा विश्वास है कि वे संगठन तथा जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि परिणाम के पश्चात आशुतोष जी ने भी किसी का नाम लेकर नाराजगी नहीं जताई, जो कार्यकर्ताओं के प्रति उनके सम्मान के भाव को दर्शाता है।
समर्थकों से अपील
सोशल मीडिया पर समर्थकों द्वारा की जा रही बयानबाजी पर विराम लगाने का आह्वान करते हुए डॉ. मिश्रा ने अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया है कि वे ऐसा कोई कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष जी को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचे।
उन्होंने कहा कि हमारी ताकत हमारी एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं।
राजनीतिक परिपक्वता का संदेश देते हुए डॉ. मिश्रा ने अंत में लिखा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा के इस बयान को दतिया भाजपा में उपचुनाव हार के बाद उपजे असंतोष को शांत करने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

