बुलंद सोच।
भारत में नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा गाओकाओ की व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है। चीनी शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन हर वर्ष जून में किया जाता है। यही परीक्षा देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है, जिसमें हर वर्ष एक करोड़ से अधिक विद्यार्थी शामिल होते हैं। प्रतिभागियों की बड़ी संख्या और सख्त नियमों के कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कठिन स्कूली व कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है।
प्रश्नपत्रों की गोपनीयता के कड़े नियम
गाओकाओ परीक्षा के प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए चीन बेहद कड़े कदम उठाता है। प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए चुने गए विशेषज्ञों और शिक्षकों को कई सप्ताह तक एक सुरक्षित परिसर में रखा जाता है। इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से हर तरह का संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है, जिसमें मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य संचार साधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। परिसर में भोजन और अन्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी लगातार कड़ी निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता प्रभावित न हो।
परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उनकी सुरक्षित छपाई की जाती है और उन्हें सीलबंद पैकेटों में पैक कर कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। पूरे परिवहन और वितरण तंत्र पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी रखी जाती है, साथ ही पुलिस सुरक्षा और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था भी लागू रहती है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले किसी भी तरह सार्वजनिक न हो।
चर्चा का मुख्य कारण
भारत में नीट परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच चीन की यह व्यवस्था इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वहां प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बेहद सख्त सुरक्षा और गोपनीयता के बीच पूरी की जाती है।
