बुलंद सोच।
एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि पसंदीदा राजनीतिक दल की हार के बाद मतदाताओं का सामाजिक भरोसा कम हो जाता है।
कई मामलों में यह स्थिति ऐसी हो जाती है कि दोस्त और रिश्तेदार भी विरोधी जैसे लगने लगते हैं। एक हालिया शोध रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है, जिसमें बताया गया है कि पसंदीदा पार्टी की हार पर मतदाताओं का मन कई बार इतना खिन्न हो जाता है कि उन्हें अपने रिश्तेदार और दोस्त भी दुश्मन की तरह लगने लगते हैं।
यह भी देखा गया है कि जहां चुनाव चल रहे हों, वहां नुक्कड़-चौराहों पर लोगों की आपसी चर्चा में राजनीतिक मुद्दों पर गर्मागर्म बहस होना आम बात है। जब चुनाव के नतीजे आते हैं, तो यही राजनीतिक आक्रामकता कई बार आपसी संबंध तक बिगाड़ देती है।

