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2026-08-01

मध्यप्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन 33 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में शामिल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्यप्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को 33 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया है। चयन के बाद सारांश जैन ने एक विशेष बातचीत में कहा कि क्रिकेट में उम्र नहीं, बल्कि प्रदर्शन और फिटनेस मायने रखते हैं।

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सारांश ने बताया कि उन्हें भारतीय टीम में चयन की खबर उस समय मिली, जब वह सुबह हनुमान मंदिर में थे। उन्हें पता था कि टीम की घोषणा दोपहर में होनी है। मंदिर से बाहर निकलने पर उन्हें कई मिस्ड कॉल और मैसेज मिले। तभी उनके टीममेट पार्थ साहनी का फोन आया, जिन्होंने उन्हें बधाई दी और बताया कि उनका चयन हो गया है। सारांश को पहले तो विश्वास नहीं हुआ, जिस पर पार्थ ने उन्हें स्क्रीनशॉट भी भेजा। अपना नाम देखकर सारांश बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा कि यह उनकी जिंदगी के सबसे खुशी भरे पलों में से एक था, जिसका सपना वह और उनका परिवार कई सालों से देख रहे थे।

सीधे टेस्ट टीम में जगह मिलने की उम्मीद पर सारांश ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों से उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं ने उनके प्रदर्शन पर ध्यान दिया और उन्हें उसी का इनाम मिला है।

33 साल की उम्र में टेस्ट टीम में जगह मिलने की चर्चा पर सारांश ने कहा कि वह हमेशा कहते हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगर कोई फिट है और मेहनत करता है, तो मैदान पर उम्र दिखाई नहीं देती। सारांश को भरोसा था कि आज नहीं तो एक-दो साल में वह भारत के लिए जरूर खेलेंगे।

व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा

सारांश ने अपने जीवन का सबसे कठिन दौर 2014-15 को बताया, जब उनके पिता को मुंह का कैंसर हो गया था। उस समय उनके लिए परिवार और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया था और उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था।

पिता की सर्जरी के बाद जब वह बोल नहीं सकते थे, तब उन्होंने एक पर्ची पर लिखकर सारांश को संदेश दिया था: ‘मैं ठीक हूं बेटा, तुम बस अच्छा क्रिकेट खेलो, मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा।’ सारांश ने बताया कि वही चिट्ठी उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई और उसकी तस्वीर आज भी उनके फोन में है।

सारांश ने बताया कि उनके पिता भी रणजी क्रिकेटर रहे हैं और उन्हें क्रिकेट खेलने की प्रेरणा उन्हीं से मिली। उनके पिता भारत के लिए नहीं खेल पाए थे, इसलिए हमेशा चाहते थे कि सारांश टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करें। सारांश ने कहा कि भारतीय टीम में उनका चयन उनके साथ-साथ उनके पिता के सपने के पूरा होने जैसा भी है।

सारांश अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार और पत्नी को देते हैं। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता, भाई-बहनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनकी शादी 2022 में हुई थी और उसके बाद जिंदगी में काफी बदलाव आए। वह मजाक में अपनी पत्नी को अपना ‘लेडी लक’ कहते हैं। शादी के अगले ही दिन उन्हें रणजी ट्रॉफी के मैच के लिए जाना पड़ा था और क्रिकेट की वजह से वे ज्यादा समय साथ नहीं बिता सके, लेकिन उनकी पत्नी ने कभी शिकायत नहीं की और हमेशा उनका साथ दिया।

करियर और भविष्य की उम्मीदें

अपने फिटनेस रूटीन और डाइट पर सारांश ने बताया कि कुछ खास नहीं है। वह अपने ट्रेनर मयंक अग्रवाल जो भी बताते हैं, उसी के अनुसार ट्रेनिंग करते हैं और डाइट में भी उनकी सलाह मानते हैं। वह ज्यादा मीठा और ऑयली खाना नहीं खाते हैं।

सारांश ने अपने करियर में चंद्रकांत पंडित की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि पंडित ने उन्हें लगातार मौके दिए और जब वह मध्यप्रदेश के कोच बने तो उन्होंने सारांश पर भरोसा दिखाया। सारांश ने कहा कि पंडित ने उन्हें मंच दिया और उन्होंने उनको निराश नहीं किया।

टेस्ट डेब्यू को लेकर सारांश ने कहा कि यह उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने बताया कि यह फैसला कोच और कप्तान का होगा। हेड कोच गौतम भाई और शुभमन गिल दोनों काफी ओपन माइंडेड हैं। सारांश ने कहा कि उनका जो भी फैसला होगा, वह उसे खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे।

अगर उन्हें डेब्यू कैप मिलती है तो वह इस सदी में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी होंगे। सारांश ने कहा कि यह उनके लिए बहुत गर्व की बात होगी और इससे उन घरेलू खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी, जिनकी उम्र थोड़ी ज्यादा हो गई है।

मौजूदा भारतीय टीम में कई स्पिन ऑलराउंडर होने पर सारांश ने कहा कि जहां भी टीम उन्हें मौका देगी, वह वहां अपना 100% देंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़े, वह तैयार हैं।

सारांश ने रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर और आवेश खान से मिली प्रेरणा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब आप उसी टीम में खेल रहे हों, जहां वेंकटेश अय्यर, आवेश खान, रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ी हों, तो उन्हें देखकर काफी मोटिवेशन मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर वे यहां से भारतीय टीम तक पहुंच सकते हैं तो वह भी पहुंच सकते हैं।