बुलंद सोच, रेवाड़ी।
भारत की शर्मिला धनकड़ ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की पैरा शॉटपुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने इस इवेंट में 9.81 मीटर का थ्रो फेंककर यह उपलब्धि हासिल की।
व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष
शर्मिला दो साल की उम्र से ही एक पैर में पोलियो से पीड़ित हैं। उनकी मां सरोज बचपन से नेत्रहीन हैं। सरोज ने बताया कि शर्मिला कक्षा 1 से 10 तक टॉपर रही थीं। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। शर्मिला ने जानकारी दी कि उनका पहला पति नशा करता था। दूसरी बेटी के जन्म के बाद से ही स्थिति और खराब हो गई थी। 2012 में रेवाड़ी के गुरकावास गांव में उनके पहले पति ने उन्हें और उनकी दो बेटियों को निर्वस्त्र करके सड़क पर फेंक दिया था। उस समय पड़ोसियों ने उन्हें कंबल और रजाई से लपेटा था। इसके बाद उनके माता-पिता जय लाल और सरोज उन्हें अपने गांव छिथरौली ले गए थे।

दूसरा विवाह और खेल में सहयोग
पहले पति से तलाक के बाद शर्मिला ने 2018 में अजीत सिंह से दूसरी शादी की। अजीत प्लंबर और पंप टेक्नीशियन थे। अजीत ने शर्मिला को खेल में आगे बढ़ाने के लिए अपना काम तक छोड़ दिया। उन्होंने शर्मिला की दोनों बेटियों की भी देखभाल की। 2018 में हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के दौरान शर्मिला ने तीन महीने तक बस कंडक्टर के रूप में भी काम किया था। ग्लासगो में गोल्ड जीतने के बाद शर्मिला ने अपनी मां और दूसरे पति अजीत सिंह को सेलिब्रेशन के लिए साथ बुलाया।
भविष्य की उम्मीदें
ग्लासगो खेलों से एक साल पहले ही शर्मिला के पिता का निधन हो गया था। शर्मिला अभी रेवाड़ी में किराए के मकान में रहती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस गोल्ड मेडल के बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और हरियाणा सरकार के सहयोग से वह अपना खुद का घर खरीद सकेंगी। इससे पहले वह बर्मिंघम पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स और हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में चौथे स्थान पर रही थीं।


