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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर तक पहुंचने के लिए एक और नया मार्ग तैयार किया जा रहा है। यह मार्ग सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल (पुराना महाराजवाड़ा भवन) के सामने स्थित पुराने महाकाल थाना भवन को तोड़कर प्राचीन महाकाल द्वार से सटाकर बनाया गया है। इसके पूरा होने पर श्रद्धालु हरसिद्धपाल-चौबीसखंभा माता मंदिर मार्ग से सीधे मंदिर तक पहुंच सकेंगे। सामान्य दिनों में यह मार्ग आवागमन के लिए उपयोग होगा, जबकि महाशिवरात्रि, नागपंचमी, श्रावण-भादौ और अन्य भीड़भाड़ वाले अवसरों पर प्रशासन इसे दर्शन के बाद श्रद्धालुओं के एक्जिट मार्ग के रूप में भी इस्तेमाल कर सकेगा। दर्शन के उपरांत श्रद्धालु इस मार्ग से चौबीस खंभा मंदिर या शिप्रा नदी के रामघाट जा सकेंगे।
मार्गों की बढ़ती संख्या
महाकाल मंदिर में प्रतिवर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों में मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों का लगातार विस्तार किया गया है। करीब एक दशक पहले तक मंदिर पहुंचने के लिए केवल पांच-छह प्रमुख रास्ते थे, जिनकी संख्या बीते कुछ वर्षों में बढ़कर नौ और अब 10 हो गई है। यह 10वां नया मार्ग पर्यटन विभाग के सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के लिए भी मुख्य पहुंच मार्ग बना है। इसी होटल के कई कमरों से महाकाल मंदिर के शिखर दर्शन होते हैं और इसके प्रीमियम कमरों का किराया प्रतिदिन 50 हजार रुपये तक है। यह नया मार्ग होटल आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए सुविधा प्रदान करेगा।
प्राचीन महाकाल द्वार का संरक्षण
नया रास्ता जिस प्राचीन महाकाल द्वार से सटाकर बनाया जा रहा है, उसके संरक्षण और जीर्णोद्धार पर वर्ष 2022 में दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। कभी यही महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाला प्रमुख पैदल मार्ग था, जो वर्षों तक बंद रहा। इसके पुनरुद्धार के बाद अब उसी ऐतिहासिक धरोहर के पास नया संपर्क मार्ग विकसित किया जा रहा है। यह प्राचीन मार्ग 77 मीटर लंबा और 3.74 मीटर चौड़ा है, जिसके दोनों ओर विरासत और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय दिखाई देगा।
महाकाल मंदिर तक पहुंच के 10 मुख्य मार्ग
महाकाल मंदिर तक पहुंचने के मुख्य 10 मार्ग इस प्रकार हैं:
* **पूर्व दिशा-1:** महाकाल चौराहे से पारंपरिक अहिल्याबाई मार्ग।
* **पूर्व दिशा-2:** अवंतिका हाट बाजार एवं पार्किंग होकर प्रवेश।
* **पूर्व दिशा-3:** नीलकंठ द्वार मार्ग, जो बेगमबाग, भारत माता मंदिर व मानसरोवर भवन की ओर से जोड़ता है।
* **पश्चिम दिशा-4:** त्रिवेणी कला संग्रहालय होकर महाकाल महालोक के नंदी द्वार से प्रवेश।
* **पश्चिम दिशा-5:** त्रिवेणी संग्रहालय के पीछे स्थित पिनाकी द्वार से पहुंच।
* **पश्चिम दिशा-6:** शक्ति पथ-सम्राट अशोक पुल के रास्ते मानसरोवर भवन होकर मंदिर तक पहुंच।
* **दक्षिण दिशा-7:** हरसिद्धि शक्तिपीठ चौराहा-पुराना रुद्रसागर पुल मार्ग।
* **उत्तर दिशा-8:** प्राचीन महाकाल द्वार से मंदिर पहुंच।
* **दक्षिण दिशा-9:** बड़ा गणेश मंदिर से सटी गली के रास्ते हरसिद्धि पाल मार्ग से आवागमन।
* **दक्षिण दिशा-10 (निर्माणाधीन):** पुराने महाकाल थाना भवन की जगह बन रहा नया मार्ग, जो हरसिद्धि पाल-चौबीसखंभा माता मंदिर मार्ग को सीधे महाकाल क्षेत्र से जोड़ेगा।
11वें अंडरपास का निर्माण
महाकाल मंदिर तक पहुंच का अगला 11वां बड़ा मार्ग हरिफाटक से महाकाल महालोक तक बनने वाला अंडरपास होगा। लोक निर्माण विभाग 630 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और सात मीटर गहरा अंडरपास बना रहा है। इसका एक सिरा हरिफाटक पुल के पास और दूसरा महाकाल महालोक के नंदी द्वार के समीप खुलेगा। इस मार्ग से पैदल श्रद्धालुओं के साथ छोटे चारपहिया वाहन भी सीधे महाकाल क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। इस परियोजना को जून-2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके बाद महाकाल मंदिर तक पहुंचने का सड़क नेटवर्क और अधिक व्यवस्थित व सुगम हो जाएगा।

