बुलंद सोच, उज्जैन।
स्मार्ट सिटी उज्जैन के फ्रीगंज इलाके में हुई करोड़ों रुपए की हाई-टेक मोबाइल चोरी के मामले में पुलिस मुंबई तक पहुंच चुकी है। इस संबंध में मुंबई से दो सगे भाइयों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि, पूछताछ के बाद पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा।
जांच में यह खुलासा हुआ कि चोरों ने वारदात के दौरान जिस मोबाइल और नंबर का इस्तेमाल किया था, वह मुंबई की झुग्गी बस्ती में रहने वाले दो मजदूर भाइयों का था। यह मोबाइल पहले ही चोरी हो चुका था। इन मजदूरों ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस में दर्ज कराई हुई थी। फिलहाल, पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।
चोरी की वारदात और तरीका
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह चोरी 10 जुलाई की रात को हुई थी, जब चोरों ने शहर के दो बड़े मोबाइल स्टोर्स को निशाना बनाया था। इनमें हाई च्वाइस मोबाइल और एसएस मोबाइल से कुल 123 मोबाइल चोरी किए गए।
सीसीटीवी फुटेज में चार शातिर बदमाश दिखाई दिए थे। इनमें से तीन चोर दुकानों का ताला तोड़कर अंदर चोरी कर रहे थे, जबकि चौथा साथी बाहर खड़ी कार में बैठकर पूरे इलाके की रेकी और निगरानी कर रहा था।
चोरों की भागने की रणनीति
जांच में यह भी पता चला है कि चोरों को पुलिस की काम करने की शैली और साइबर ट्रैकिंग की पूरी जानकारी थी। उज्जैन में चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद चोर मुख्य हाइवे के बजाय जंगलों और ग्रामीण रास्तों से भागे।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, चोर उज्जैन से निकलकर देवास, खातेगांव, कन्नौद, आष्टा, बैतूल और अठनेर के घने जंगलों के रास्ते महाराष्ट्र की सीमा में घुसे। इसके बाद अमरावती के देहाती इलाकों से होते हुए मुंबई पहुंचे। पूरे रास्ते में उन्होंने एक भी टोल नाके का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि सीसीटीवी कैमरों और फास्टैग से उनकी आवाजाही का कोई डिजिटल रिकॉर्ड तैयार न हो सके।
पहचान छुपाने के लिए तैयारी
पुलिस के मुताबिक, चोरों ने पहचान छुपाने और सुराग न छोड़ने के लिए पूरी तैयारी की थी। उन्होंने फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया और अपने फिंगरप्रिंट व चेहरे छुपाए।
चोरी के दौरान सभी ने हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मास्क पहन रखा था। इसके अलावा, वारदात के समय इस्तेमाल किए गए मोबाइल से एक भी फोन कॉल नहीं किया गया, जिससे टावर डंप डेटा से भी उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।

