BREAKING NEWS
2026-07-31

मध्य प्रदेश में 785 बाघ, ‘पुजारी’ और ‘मौसी मां’ जैसे अनोखे नामों से पहचान

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश ने बाघ संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राज्य में बाघों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि पारंपरिक जंगल छोटे पड़ने लगे हैं। प्रदेश के उन इलाकों में भी बाघ देखे जा रहे हैं, जहां पहले उनकी कल्पना नहीं की गई थी। वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार, प्रदेश में 785 बाघ हैं। प्रदेश में बाघों के नामकरण किए गए हैं। जब बाघों पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा सामने आया, तब युद्ध स्तर पर नियंत्रण के प्रयास किए गए। बड़ी संख्या में कुत्तों को टीके और बूस्टर डोज लगाए गए। रिकॉर्ड में भले ही बाघों का वैज्ञानिक नाम टी-1, टी-2 दर्ज है, लेकिन टाइगर रिजर्व में पर्यटक उन्हें पुजारी, बजरंग, छोटा भीम जैसे नामों से पहचानते हैं। कई बार पर्यटक इन प्रसिद्ध बाघों को देखने के लिए दो से तीन दिनों तक टाइगर रिजर्व का भ्रमण करते हैं।

Advertisement

बाघों के अनूठे नाम और उनकी पहचान

बांधवगढ़ के बाघ को ‘पुजारी’ नाम उसकी अनूठी और शांत आदतों के कारण मिला था; वह हर दिन पानी में स्नान कर, शांत भाव से ध्यान लगाता और सुबह एक पेड़ के पास पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खड़ा हो जाता था। बाघ पुजारी की मृत्यु मई 2026 में एक अन्य नर बाघ के साथ हुए संघर्ष में हुई थी। कान्हा में ध्वजा झंडी क्षेत्र की बाघिन का नाम ‘डीजे’ है। रातापानी टाइगर रिजर्व के बाघों को ‘रूद्राक्ष’ और ‘त्रिशूल’ के नाम से जाना जाता है, जबकि खिवनी के बाघ ‘युवराज’ और ‘मीरा’ हैं। पन्ना में बहुत ही कम दिखाई देने वाला बाघ ‘मिस्टर इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध है। संजय टाइगर रिजर्व की बाघिन ‘मौसी मां’ अपनी बहन के तीन शावकों को भी पालती है। इसी तरह, अन्य बाघों का नामकरण भी उनके हाव-भाव के कारण हुआ है।

संरक्षण प्रयास और नए मॉडल

बांधवगढ़ कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि मां से बिछड़े व अनाथ बाघ शावकों को दोबारा जंगल में बसाने के लिए रिवाइल्ड यानी जंगल में पुनः बसाने का मॉडल विकसित किया गया है। इस प्रयास से प्रदेश में अब तक 20 से ज्यादा बाघ शावकों को प्रशिक्षण देने के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। इसके अलावा, दो नए टाइगर रिजर्व, रातापानी व माधव टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं। नौ टाइगर रिजर्व, 26 अभयारण्य और कोर से लेकर बफर तक बाघों की निगरानी बढ़ाई गई है। प्रदेश में आदिवासी समुदाय बाघ को केवल एक जंगली जानवर नहीं, बल्कि ‘बाघदेव’ के रूप में पूजते हैं। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा ने कहा कि टाइगर रिजर्व में बाघों ने अपने हाव-भाव के कारण पर्यटकों में अलग पहचान बनाई है और उनके अलग-अलग नाम हैं। डॉ. समीता राजौरा ने यह भी बताया कि वे इन बाघों की ब्रांडिंग भी कर रहे हैं। डॉ. समीता राजौरा के अनुसार, प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ी है और उसके अनुपात में बाघों के संरक्षण के प्रति भी कई प्रयास किए गए हैं, जो कारगर सिद्ध हुए हैं।

अन्य घटनाक्रम

भोपाल के कलियासोत में बाघ का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। उधर, कलारा में तेंदुए के खौफ से गश्त और रेस्क्यू की मांग की जा रही है।