बुलंद सोच, भोपाल।
बागसेवनिया के हिस्ट्रीशीटर गांजा तस्कर शैलू उर्फ शैलेश संकत (कंजर) पर पहली बार पिट-एनडीपीएस एक्ट लगाया गया है। भोपाल पुलिस के अनु जिले में किसी ड्रग तस्कर पर इस कानून के तहत की गई यह पहली कार्रवाई है।
भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने शैलेश संकत के खिलाफ छह महीने के निरोध (डिटेंशन) का आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत आरोपित को केंद्रीय जेल, इंदौर में निरुद्ध किया जाएगा।
इसके परिणामस्वरूप, आरोपित सामान्य आपराधिक मामलों की तरह ट्रायल या नियमित जमानत प्रक्रिया का लाभ लेकर तुरंत जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।
बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि 35 वर्षीय शैलेश संकत वर्ष 2020 से लगातार गांजा तस्करी में लिप्त है। वह बाहरी राज्यों से गांजा मंगवाकर भोपाल में सप्लाई करता था।
पुलिस की नजर से बचने के लिए उसने बिचौलियों और एजेंटों का एक नेटवर्क खड़ा कर रखा था, जिसके जरिए वह अपनी तस्करी संचालित करता था।
आरोपित के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के पांच मामलों सहित कुल 42 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
शैलेश संकत महीनेभर के भीतर ही जेल से रिहा हुआ था, जिसके बाद उसने फिर से मादक पदार्थों की तस्करी शुरू कर दी थी।
उसकी लगातार आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए बागसेवनिया थाना पुलिस ने उसका विस्तृत आपराधिक रिकार्ड, तस्करी के नेटवर्क और गतिविधियों का एक प्रस्ताव तैयार किया।
यह प्रस्ताव भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा को भेजा गया, जिसके मंजूर होने के बाद उसके खिलाफ धारा 3(1), पिट-एनडीपीएस एक्ट, 1988 के तहत निरोध आदेश जारी किया गया।
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई उन आदतन तस्करों के लिए एक सख्त संदेश है, जो जेल से छूटने के बाद फिर उसी कारोबार में लौट आते हैं।
पिट-एनडीपीएस एक्ट क्या है?
यह एक निरोधात्मक कानून है, सजा का नहीं।
यह आदतन और संगठित ड्रग तस्करों पर लागू किया जाता है।
इस कानून के तहत कार्रवाई अपराध होने के बाद नहीं, बल्कि भविष्य में अपराध रोकने के लिए की जाती है।
इसके अंतर्गत प्रशासनिक आदेश से आरोपित को जेल भेजा जा सकता है और सामान्य आपराधिक ट्रायल का इंतजार नहीं किया जाता।
निरोध अवधि में आरोपित जेल में ही रहता है।
इस कार्रवाई से पहले पुलिस एक विस्तृत डोजियर और आपराधिक इतिहास प्रस्तुत करती है, जिसकी कानूनी समीक्षा एडवाइजरी बोर्ड द्वारा की जाती है।

