बुलंद सोच, ग्वालियर।
भोपाल और ग्वालियर के बीच लगभग 320 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल फोरलेन कॉरिडोर को विकसित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने हेतु टेंडर जारी कर दिया है। डीपीआर तैयार करने के दौरान तीन संभावित अलाइनमेंट का सर्वेक्षण कर अंतिम मार्ग का निर्धारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भूमि अधिग्रहण, बायपास, इंटरचेंज और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर परियोजना का अंतिम स्वरूप तैयार किया जाएगा।
डीपीआर और सर्वेक्षण
सर्वेक्षण के लिए 6.23 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है, और अंतिम रिपोर्ट 12 माह में तैयार होने की उम्मीद है। प्रस्तावित फोरलेन किन शहरों और गांवों से होकर गुजरेगा, यह अभी तय नहीं है। चयनित एजेंसी द्वारा सर्वेक्षण पूरा होने के बाद अलाइनमेंट प्रस्तावित किए जाएंगे, जिनकी व्यवहार्यता के आधार पर निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह परियोजना ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी, जिसका अर्थ है कि सड़क पूरी तरह से नए मार्ग पर बनेगी और प्रवेश तथा निकास केवल निर्धारित इंटरचेंजों से ही संभव होगा। एमपीआरडीसी ने डीपीआर तैयार करने के लिए यह शर्त रखी है कि कंसल्टेंट विभिन्न विकल्पों का सर्वेक्षण कर सबसे उपयुक्त अलाइनमेंट का चयन करे। इसके लिए भू-आकृति, यातायात, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव, निर्माण लागत और भविष्य की यातायात आवश्यकता जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
डीपीआर के दौरान तीन संभावित रूटों का जीआईएस आधारित परीक्षण भी किया जाएगा। इसके उपरांत, संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने और तकनीकी परीक्षण पूरा होने पर अंतिम अलाइनमेंट तय होगा। एमपीआरडीसी ने इस परियोजना की डीपीआर तैयार करने के लिए 12 माह की समय-सीमा निर्धारित की है। कंसल्टेंट को सड़क की ज्यामितीय डिजाइन, पुल-पुलिया, इंटरचेंज, बायपास, सर्विस रोड, जल निकासी व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिताओं के स्थानांतरण और अन्य सभी तकनीकी पहलुओं का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना होगा।
दूरी में कमी और यात्रा समय
वर्तमान में ग्वालियर से भोपाल जाने के लिए शिवपुरी-गुना होकर जाना पड़ता है, जिसकी दूरी लगभग 428 किलोमीटर है और इसे तय करने में साढ़े सात घंटे का समय लगता है। नए रूटों की तलाश से संभावित दूरी 320 किलोमीटर हो जाएगी, जिससे भोपाल-ग्वालियर के बीच की दूरी 100 किलोमीटर कम होगी।
कंसल्टेंट कंपनी को ऐसा रूट अंतिम रूप देकर देना होगा, जिसमें भू-अधिग्रहण में कोई कठिनाई न हो और निर्माण भी तेजी से हो सके। यह परियोजना पूरी होने पर भोपाल और ग्वालियर के बीच तेज, सुरक्षित और नियंत्रित यातायात वाला नया कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

