बुलंद सोच, बुरहानपुर।

सोमवार दोपहर बुरहानपुर तहसील कार्यालय में पदस्थ भृत्य दिनेश पाटिल, जो इंदिरा कॉलोनी के निवासी थे, ने कीटनाशक पी लिया। परिजन उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
बताया गया है कि सोमवार दोपहर वह कार्यालय से लंच अवकाश पर घर पहुंचा था। उसने अपनी पत्नी से खाना लगाने के लिए कहा। इसी बीच, उसने अचानक कीटनाशक की बोतल निकाली और उसे पीना शुरू कर दिया। यह देख उसकी पत्नी व पुत्र दौड़े और किसी तरह बोतल छीनकर फेंकी।
बावजूद इसके, जहर की ज्यादा मात्रा पी जाने के कारण उसकी मौत हो गई। साथी कर्मचारियों के अनुसार, उसे कोई बुरी आदत नहीं थी, लेकिन उस पर काफी कर्ज था। हालांकि, अभी आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। संभवतः इसी के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
ज्ञात हो कि दो दिन पहले ही सीतापुर पंचायत के सरपंच अमर सिंह मंडलोई ने पंचायत सचिव व अन्य पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। कर्मचारियों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया था, जहां उपचार के बाद उसकी जान बच गई थी।
आसानी से उपलब्धता बनी चुनौती
कीटनाशक पीकर आत्महत्या का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पारिवारिक विवाद, मानसिक प्रताड़ना अथवा कर्ज से परेशान दर्जनों युवाओं ने आत्महत्या के लिए कीटनाशकों का सहारा लिया है। इसका एक मुख्य कारण इनकी बाजार में आसानी से उपलब्धता है।
कीटनाशकों के विक्रय को लेकर न तो अब तक कोई गाइडलाइन तय की गई है और न ही प्रशासन ने कोई निर्देश जारी किए हैं। कोई भी व्यक्ति दुकानों में जाकर आसानी से इन्हें खरीद सकता है। स्थिति यह है कि दुकानदार यह भी पता लगाने का प्रयास नहीं करता कि कीटनाशक खरीदने वाला वास्तव में किसान है भी या नहीं।
कीटनाशकों पर शासन कोई सब्सिडी नहीं देता है, इसलिए उनके विक्रय को लेकर भी कोई गाइडलाइन नहीं है। इस संबंध में और जानकारी जुटाई जाएगी, यह बात उप संचालक कृषि एमएस देवके ने कही।

