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2026-08-04

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार, कांग्रेस-भाजपा 2-2 की बराबरी पर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा को हार मिली थी।
इन परिणामों के साथ, प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद हुए चार विधानसभा सीटों के उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस दो-दो की बराबरी पर आ गई हैं। इन चार सीटों में से पहली दो सीटें भाजपा ने जीती थीं, जबकि बाद की दो सीटें कांग्रेस ने जीती हैं। कांग्रेस द्वारा जीती गई दोनों सीटें पहले भी कांग्रेस के पास ही थीं और विभिन्न कारणों से रिक्त हुई थीं। अब विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या पुनः 65 हो जाएगी।

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पूर्व के उपचुनावों का विवरण

विधानसभा चुनाव में बुदनी से निर्वाचित होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और वे निर्वाचित हुए, जिसके परिणामस्वरूप बुदनी सीट रिक्त हो गई थी। इस रिक्त हुई सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के रमाकांत भार्गव विजयी हुए थे।
इसी प्रकार, छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। यहां हुए उपचुनाव में भाजपा ने कमलेश शाह को ही अपना प्रत्याशी बनाया था और उन्होंने जीत दर्ज की थी।
इसके बाद श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के भाजपा में शामिल होने के कारण हुआ। भाजपा सरकार में उन्हें वन मंत्री बनाया गया था। विजयपुर उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को पराजित किया था।
दतिया सीट की स्थिति भी इसी प्रकार बनी, जहां कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक धोखाधड़ी के एक मामले में न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद वे अयोग्य हो गए। विधानसभा सचिवालय ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया था, और राजेंद्र भारती को न्यायालय से भी कोई राहत नहीं मिली थी। इसे देखते हुए उपचुनाव कराया गया, जिसमें कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।

मतदाताओं का रुख

उपचुनावों के परिणामों से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य प्रदेश में जनता थोपे हुए उपचुनावों को नकार देती है। यह बात विजयपुर और दतिया दोनों ही सीटों पर सामने आई है। विजयपुर का उपचुनाव रामनिवास रावत के विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने के कारण हुआ था, जबकि दतिया में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होना इसका कारण बना। इन दोनों ही चुनावों में मतदाताओं ने सत्ताधारी दल को नकार दिया।

दतिया सीट का चुनावी इतिहास

दतिया विधानसभा सीट पर कभी भी किसी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल नहीं की है; यहां हार-जीत का निर्णय सदैव कड़े मुकाबले में ही हुआ है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा 2008, 2013 और 2018 में लगातार तीन बार इस सीट से भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे।
इससे पहले भाजपा ने 1990 में यहां जीत दर्ज की थी, जब पार्टी के टिकट पर शंभू तिवारी निर्वाचित हुए थे। भारतीय जनसंघ ने 1972 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। 1977 के चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद यहां से श्याम सुंदर सैयाम जीते थे, और 1980 में वे पुनः कांग्रेस से निर्वाचित हुए। 1985 में कांग्रेस से राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी।
वर्तमान उपचुनाव में विजयी हुए घनश्याम सिंह स्वयं 1993 और 2003 में भी इसी सीट से कांग्रेस की टिकट पर जीत चुके हैं। इस सीट पर जीत का अंतर अधिकतर चुनावों में 10 हजार से कम ही रहा है।
वर्ष 2023 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7742 मतों से हराया था। जबकि 2018 के चुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने राजेंद्र भारती से ही कड़े संघर्ष में 2656 मतों से जीत हासिल की थी। 2003 के चुनाव में घनश्याम सिंह ने भाजपा के अवधेश नायक को 2904 मतों से पराजित किया था।

बसई में भाजपा की जीत

दतिया विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले बसई में पहली बार भाजपा ने विजय प्राप्त की। संगठन ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केवल यहीं सभा करने का निर्देश दिया था।
जब यहां का परिणाम सामने आया, तब 13वें राउंड तक कांग्रेस लगभग 13,000 मतों से आगे चल रही थी। 14वां और 15वां चक्र बसई का था, और इन अंतिम दो चक्र की गणना में भाजपा ने जीत का अंतर आधा कर दिया। बसई में भाजपा लगभग 6000 मतों से विजयी हुई।