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2026-07-29

दतिया विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण और व्यक्तिगत संपर्क निर्णायक

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, दतिया।

दतिया सहित ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग से जुड़े इलाकों में उत्तर प्रदेश की सीमा और सामाजिक संरचना के कारण जातीय समीकरण चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। दतिया में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है। यहां किसी एक समाज के वोट से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।

प्रमुख दलों की रणनीति

भाजपा के लिए ब्राह्मण-सवर्ण-वैश्य और ओबीसी वोट बैंक को एकजुट रखना अहम है। वहीं, कांग्रेस की नजर जाटव-अहिरवार और अल्पसंख्यक वोटों पर है। कुशवाहा-काछी, यादव, लोधी, बघेल-पाल और अन्य सामाजिक समूहों का रुख भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

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उम्मीदवारों की ताकत

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह का व्यक्तिगत संपर्क और दो बार विधायक रहने का अनुभव भाजपा के लिए चुनौती है। भाजपा के पक्ष में सत्ता और संगठन की ताकत के साथ आशुतोष तिवारी की जातीय पृष्ठभूमि काम कर सकती है। हालांकि, 30 जुलाई को मतदान के बाद ही यह साफ होगा कि दतिया के मतदाताओं ने जातीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और सत्ता-संगठन में से किसे ज्यादा महत्व दिया।

जाटव-अहिरवार वोट पर कांग्रेस की उम्मीद

दतिया विधानसभा में अहिरवार-जाटव समाज की आबादी करीब 14.7% बताई जा रही है, जो ब्राह्मण समाज के लगभग बराबर है। कांग्रेस का परंपरागत दलित वोट बैंक इस चुनाव में उसके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जाटव-अहिरवार वोट कांग्रेस के पक्ष में मजबूती से जाता है, तो घनश्याम सिंह का मुकाबला काफी मजबूत हो सकता है। वहीं, भाजपा की कोशिश इस वोट बैंक में सेंध लगाने की होगी।

ब्राह्मण समाज का भाजपा के लिए महत्व

जातीय आंकड़ों के अनुसार, दतिया विधानसभा में ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी 14.8% है, जो सबसे बड़ा सामाजिक समूह है। आशुतोष तिवारी के इसी समाज से होने के कारण भाजपा इस वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। पूर्व मंत्री और दतिया में प्रभाव रखने वाले नेता नरोत्तम मिश्रा भी आशुतोष के समर्थन में सक्रिय हैं। ऐसे में भाजपा के सामने ब्राह्मण मतदाताओं के साथ अपने सवर्ण और वैश्य आधार को भी मजबूत रखने की चुनौती है।

कुशवाहा-काछी और अन्य महत्वपूर्ण वर्ग

दतिया में कुशवाहा-काछी समाज की आबादी करीब 12.2% बताई जा रही है, जो दतिया के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में शामिल है। दोनों दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा की ओर से कुशवाहा समाज से आने वाले नेताओं को प्रचार में सक्रिय किया जा रहा है। इस वर्ग का रुख चुनाव के अंतिम नतीजे को प्रभावित कर सकता है। दतिया में यादव समाज की आबादी 7.4% और लोधी समाज की 6.9% बताई गई है। दोनों को मिलाकर यह हिस्सेदारी 14% से अधिक होती है, ऐसे में इन दोनों समाजों का समर्थन भी किसी प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने में अहम हो सकता है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रहलाद पटेल और लोधी समाज के नेताओं को प्रचार में सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी की कोशिश इन वर्गों के अपने सामाजिक आधार को बनाए रखने की है।

कांग्रेस का व्यक्तिगत संपर्क पर भरोसा

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया से दो बार विधायक रह चुके हैं और राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत संपर्क माना जाता है। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, हालांकि स्थानीय स्तर पर उनके पक्ष में माहौल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मुख्य भरोसा उसके परंपरागत दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर है। इसके साथ ही पार्टी की कोशिश अन्य पिछड़े और सवर्ण वर्गों में भी समर्थन जुटाने की है।

वरिष्ठ पत्रकार का विश्लेषण

वरिष्ठ पत्रकार गणेश साकल्ले ने कहा कि दतिया में दोनों ही मुख्य पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है, जो आशुतोष तिवारी के पक्ष में जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा का परंपरागत वोट ब्राह्मण, सवर्ण और वैश्य है, और ओबीसी भी लंबे समय से भाजपा को वोट देते आ रहा है। लोधी और यादव भी भाजपा को वोट देते आ रहे हैं। प्रहलाद पटेल और उमा भारती, आशुतोष तिवारी ब्राह्मण हैं। उनका यह भी कहना था कि ओबीसी वोट बैंक भाजपा की तरफ रहा है। पिछले 20 साल से पार्टी ने प्रदेश में ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाए हैं, और यादव भी उनकी तरफ आते हैं। हालांकि, कांग्रेस को दो बार विधायक रहे और राजपरिवार से आने वाले घनश्याम सिंह की छवि और स्थानीय मुद्दों पर भरोसा है। कांग्रेस के लिए अपने परंपरागत दलित वोट बैंक को पूरी तरह अपने पक्ष में बनाए रखना इस चुनाव में निर्णायक साबित होगा।

दतिया का जातीय गणित

दतिया में विभिन्न समाजों की अनुमानित आबादी इस प्रकार है:
ब्राह्मण: 14.8%
अहिरवार-जाटव: 14.7%
कुशवाहा-काछी: 12.2%
यादव: 7.4%
लोधी: 6.9%
बघेल-पाल: 5.3%
मुस्लिम: 3.7%
बनिया: 3.7%
ठाकुर-राजपूत: 3%
रावत (मीणा): 2.9%