बुलंद सोच, भोपाल।
सरकारी नौकरी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की संपत्ति दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार फर्जी आईएएस अधिकारी तृप्ति सिंह राजपूत, जो फिलहाल अशोक नगर जेल में बंद हैं, की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब उनके ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर में घूमती नजर आ रही हैं। इन तीनों ने वहां एक ब्लॉग भी बनाया था। वीडियो में तृप्ति और उनकी सहेलियों के बीच हुई बातचीत से पुलिस की जांच को एक नया आयाम मिला है।
वीडियो में तृप्ति का दावा
सामने आए वीडियो में तृप्ति लाल साड़ी में दिख रही हैं। उनकी एक सहेली उन्हें सीनियर बताती है, जबकि तृप्ति खुद को प्रोबेशनर कहती हैं। बातचीत के दौरान वह यह भी कहती हैं कि तीनों का व्यवहार ऐसा है कि उन्हें देखकर कोई अधिकारी नहीं समझ सकता। विधानसभा परिसर के बाहर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में तृप्ति की सहेली बताती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं और इसी दौरान उन्होंने अपना पहला ब्लॉग बनाने का फैसला किया। सहेली के अनुसार, विधानसभा के अंदर फोटो और वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है, इसलिए बाहर वीडियो रिकॉर्ड किया गया। वीडियो में तीनों सहज अंदाज में बातचीत करती और हंसी-मजाक करती दिखाई देती हैं।
पुलिस जांच का दायरा बढ़ा
वीडियो में एक सहेली तृप्ति को अपनी सीनियर बताती है, जिसके बाद तृप्ति खुद को सीनियर बताते हुए कहती हैं कि वह उनके साथ दोस्त की तरह रहती हैं। बातचीत में वह खुद को प्रोबेशनर भी बताती हैं। यह वीडियो अब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति ने सरकारी अधिकारी जैसी पहचान बनाने के लिए इस तरह की गतिविधियों का इस्तेमाल कितने समय तक किया। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या तृप्ति जानबूझकर ऐसी जगहों पर वीडियो बनाती थीं, जहां उनकी सरकारी अधिकारी जैसी छवि लोगों के सामने बन सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उनके साथ वीडियो में दिखाई दे रही दोनों युवतियां उनके दावों के बारे में कितना जानती थीं; जरूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ की जा सकती है।
चंदेरी में 9.80 लाख की ठगी का आरोप
तृप्ति सिंह राजपूत पर चंदेरी में चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। इस मामले में पुलिस ने तृप्ति और उनके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान भोपाल स्थित उनके घर और ससुराल की तलाशी ली गई, जहां से कथित फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान मिलने की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, तृप्ति अलग-अलग लोगों के सामने खुद को अलग-अलग सरकारी पदों पर तैनात बताती थीं। कभी वह आईएएस अधिकारी तो कभी मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर होने का दावा करती थीं। आरोप है कि इसी पहचान के जरिए वह लोगों का भरोसा हासिल करती थीं और नौकरी या सरकारी काम कराने के नाम पर रकम लेती थीं।
सीबीआई कार्ड और 'भारत सरकार' लिखी कार
जांच में तृप्ति के पास कथित तौर पर सीबीआई लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड मिले हैं। पुलिस ने एक इनोवा कार भी जब्त की है, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा था। अब पुलिस यह पता कर रही है कि इन चीजों का इस्तेमाल लोगों के सामने सरकारी अधिकारी की छवि बनाने के लिए किया जाता था या नहीं। पुलिस को तृप्ति के पास मंत्रालय और आईएएस अधिकारियों के नामों की सूची होने की जानकारी भी मिली है। आरोप है कि वह जरूरत के अनुसार इन अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनका करीबी बताती थीं। पुलिस सूची में शामिल नामों और तृप्ति के कथित संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
भोपाल में 39.17 लाख की धोखाधड़ी का मामला
बागसेवनिया थाने में तृप्ति के खिलाफ 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज है। शिकायतकर्ता रोहित लिल्हारे का आरोप है कि तृप्ति ने खुद को ट्रेनी आईएएस और एमपीटी की एडिशनल डायरेक्टर बताया। होटल-रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35.30 लाख रुपये और नौकरी के लिए 3.87 लाख रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, न तो लीज हुई और न नौकरी लगी। पैसे वापस मांगने पर केवल एक लाख रुपये ऑनलाइन लौटाए गए, जबकि बाकी 38.17 लाख रुपये नहीं लौटाए गए। इसके बाद रोहित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पूरे नेटवर्क की तलाश जारी
भोपाल मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस के मुताबिक, इन दोनों ने तृप्ति के बताए सरकारी पद की पुष्टि की थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कथित ठगी में किसकी क्या भूमिका थी। नए वीडियो, कथित फर्जी दस्तावेज और अलग-अलग मामलों के सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि तृप्ति ने कब से फर्जी अधिकारी की पहचान बना रखी थी और कितने लोगों को प्रभावित किया। विधानसभा के वीडियो में नजर आईं उनकी सहेलियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

