बुलंद सोच, भोपाल।

प्रदेश में ग्रामीण आबादी की परिसंपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना गुरुवार से प्रारंभ हो गई है। रजिस्ट्री की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी करने के लिए पटवारी को निष्पादन अधिकारी नियुक्त किया गया है। पंचायत स्तर पर एक माह के भीतर तीन विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। आवेदन के लिए आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी से ई-केवाईसी अनिवार्य होगी।
₹3,800 करोड़ का शुल्क माफ, 50 लाख से अधिक परिसंपत्तियां
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि का ड्रोन से सर्वे कराया जा चुका है और अधिकार पत्र दिए गए थे। अब इन परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। इस प्रक्रिया में सरकार को लगभग 3,800 करोड़ रुपये का शुल्क प्राप्त होता, जिसे सरकार ने कानून में संशोधन कर माफ कर दिया है। अब घर-दुकान की रजिस्ट्री के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। प्रदेश में ऐसी 50 लाख से अधिक परिसंपत्तियां हैं।
तीन चरणों में आयोजित होंगे विशेष शिविर
रजिस्ट्री की प्रक्रिया ग्राम एवं पंचायत स्तर पर तीन चरणों में आयोजित होगी, जिसके लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। पहला शिविर 17 से 19 सितंबर तक, दूसरा 24 से 26 सितंबर तक और तीसरा एक से तीन अक्टूबर तक चलेगा।
तकनीकी प्रक्रिया और नियुक्त अधिकारी
निष्पादन का कार्य मोबाइल ऐप के माध्यम से और रजिस्ट्री के पंजीयन की प्रक्रिया संपदा ऐप पर पूरी की जाएगी। पटवारी को निष्पादन अधिकारी तथा तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी को रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। रजिस्ट्री व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। एक माह में निश्शुल्क रजिस्ट्री पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय करेंगे निगरानी
इस योजना की प्रगति की निगरानी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा की जाएगी। राजस्व विभाग प्रतिदिन होने वाली रजिस्ट्री की रिपोर्ट तैयार करेगा और यदि कहीं कोई समस्या आती है जो गति को धीमा कर रही है, तो उसे चिन्हित कर समाधान किया जाएगा।
पटवारियों की आशंका पर सरकार का आश्वासन
योजना को लेकर पटवारियों ने आशंका व्यक्त की है कि निष्पादन अधिकारी बनाए जाने के कारण विवाद की स्थिति में उन पर जिम्मेदारी आ सकती है। इस संबंध में वे ज्ञापन भी दे चुके हैं। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा द्वारा यह विषय उठाए जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार स्वयं रजिस्ट्री करा रही है, इसलिए किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। राजस्व मंत्री ने भी कहा कि यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और किसी पटवारी को डरने या चिंता करने की जरूरत नहीं है। भविष्य में जमीन या संपत्ति से संबंधित किसी भी विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक प्रदान करना है, ताकि उनके पास अपनी संपत्ति का मजबूत कानूनी प्रमाण हो और वे भविष्य में आवश्यकतानुसार इसका उपयोग कर सकें।

