बुलंद सोच, ग्वालियर।
विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया की अदालत में बुधवार को एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई, जब विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस वर्दी पहनकर उपस्थित हुए। अदालत ने इस पर नाराजगी व्यक्त की और उन्हें तत्काल वापस भेजते हुए सिविल ड्रेस में दोबारा उपस्थित होने का आदेश दिया।
इसके पश्चात् थाना प्रभारी कपड़े बदलकर न्यायालय पहुंचे, जहां उन्हें शाम तक सिविल ड्रेस में अदालत में खड़ा रखा गया।
न्यायालय की चेतावनी और एसएसपी को पत्र
दरअसल, अदालत ने पूर्व में ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को एक पत्र लिखकर थाना प्रभारी की 5 अगस्त को बिना पुलिस वर्दी व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
न्यायालय ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हुई तो यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारी को अवैधानिक संरक्षण दिया जा रहा है अथवा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। ऐसी स्थिति में अदालत वैधानिक कार्रवाई के लिए बाध्य होगी।
जज की नाराजगी और दिनभर कोर्ट में खड़े रहने की सजा
बुधवार को थाना प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के साथ अदालत पहुंचे थे, लेकिन न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद वे पुलिस वर्दी में थे। इस पर विशेष न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें वापस भेज दिया और सिविल ड्रेस पहनकर आने का निर्देश दिया।
मालखाने से कट्टा गायब होने का मामला
यह पूरा मामला एक आपराधिक प्रकरण से संबंधित है, जिसमें पुलिस द्वारा एक देशी कट्टा जब्त कर उसे थाने के मालखाने में जमा किया गया था।
बाद में सुनवाई के दौरान अदालत ने जब्त कट्टा पेश करने का आदेश दिया, लेकिन पुलिस उसे न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सकी।
इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अदालत ने थाना प्रभारी को तलब किया था।

