बुलंद सोच, इंदौर।
दुनिया के 1335 शहरों में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन और तपती रातें नींद खराब कर स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। इसी महीने जारी रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में रात के तापमान में होने वाले बदलावों के कारण साल में 69 घंटे नींद में कमी आई है।
यह आकलन अंतरराष्ट्रीय एजेंसी क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा दुनिया में तापमान व जलवायु परिवर्तन के कारण नींद पर हो रहे प्रभावों को लेकर किया गया है। रिसर्च में मध्य प्रदेश के पांच शहर इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर व उज्जैन शामिल किए गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में रात के तापमान में होने वाले बदलावों के कारण साल में 69 घंटे नींद में कमी आई है। यही हाल भोपाल का भी है, जहां नींद में कमी दर्ज की गई है। नींद में खलल से सबसे ज्यादा परेशान ग्वालियर के लोग रहते हैं।
अध्ययन का आधार
रिसर्च के लिए तपती रातों में न्यूनतम तापमान और क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स को आधार बनाया गया था। क्लाइमेट से होने वाले बदलावों को देखने के लिए दक्षिणी गोलार्ध में दिसंबर से फरवरी व उत्तरी गोलार्ध में जून से अगस्त की स्थिति का आंकलन किया गया।
नींद पर तापमान का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद हमारा शरीर रात में सोते समय तापमान कम करता है। ठंडी रात इस प्रक्रिया में मदद करती है, जिससे नींद गहरी और अधिक आरामदायक आती है। जब रात का तापमान बढ़ता है तो शरीर को ठंडा रखने में मुश्किल आती है, जिससे गर्मी या उमस के दिनों में परेशानी ज्यादा आती है और नींद पूरी नहीं हो पाती है, जिससे बेचैनी बनी रहती है।
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव
रिसर्च के अनुसार, 1970-75 तक रात में गर्मी के कारण औसत 46 घंटे की नींद खराब होती थी, जिसमें जलवायु परिवर्तन का हिस्सा 2 घंटे के आसपास था। ताजा 2020-2025 के बीच औसत घंटों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई। आकलन से पता चला कि जलवायु परिवर्तन के कारण 55 साल में नींद खराब होने के घंटे 2 से बढ़कर 5 से 6 घंटे यानी दो-तीन गुना हो गए। तापमान के कारण नींद में कमी के घंटे भी कई शहरों में दोगुने तक हो गए।
देश के शहरों में स्लीप लॉस की स्थिति
भारत के दक्षिणी राज्यों में 78 से 91 घंटों में से जलवायु परिवर्तन के कारण 8 से 9 घंटे की नींद खराब हो रही है। देश के विभिन्न शहरों में स्लीप लॉस की स्थिति देखें तो चेन्नई में 93 घंटे, मुंबई में 84 घंटे, कोलकाता में 80 घंटे, अहमदाबाद में 78 घंटे व दिल्ली में 66 घंटे की नींद खराब हो रही है।
विशेषज्ञों की राय: पर्याप्त नींद है जरूरी
मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. संदीप जुल्का के अनुसार, 6 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूरी होती है। नींद पर्याप्त नहीं होने से बीमारियों का जोखिम बढ़ने लगता है। यदि एक दिन भी नींद न हो तो शरीर में कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ जाता है। ऐसा लगातार होने पर सेहत प्रभावित होने लगती है।
मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. वी.एस. पाल ने बताया कि अनुकूल तापमान और मौसम अच्छी नींद में मदद करते हैं, जबकि प्रतिकूल पर्यावरणीय बदलाव नींद की गुणवत्ता खराब कर सकते हैं। पर्याप्त नींद न मिलने से थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और नकारात्मकता बढ़ती है।

