बुलंद सोच।
29 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल रोहित हाल के दिनों में अपनी मूनलाइटिंग जॉब की वजह से चर्चा में हैं। यह मामला एक पर्सनल फायनेंस पॉडकास्ट ‘फिक्स योर फाइनेंस’ से सामने आया, जिसमें रोहित ने खुद को आईटी कर्मचारी बताया। इसके बाद सोशल मीडिया और मीडिया में रोहित और उनके काम की चर्चा होने लगी।
रोहित एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जो दिन में एक भारतीय कंपनी में और रात में एक अमेरिकन कंपनी में काम करते हैं। शो के दौरान उन्होंने बताया कि दोनों नौकरियों से उनकी मासिक आय लगभग 7 लाख रुपये है, जिससे उनका सालाना सैलरी पैकेज 84 लाख रुपये हो जाता है।
वे प्रतिदिन लगभग 16 घंटे काम करते हैं। उनके पास दो घर, एक कार और लगभग 80–82 लाख रुपये की बचत है।
वित्तीय असुरक्षा और प्रेरणा
रोहित को डर है कि भविष्य में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कारण आईटी नौकरियों पर असर पड़ सकता है। बचपन की आर्थिक कठिनाइयों के कारण वे वित्तीय असुरक्षा महसूस करते हैं, और इसी वजह से वे लगातार दो नौकरियां कर रहे हैं।
हालांकि, इस दोहरी नौकरी के कारण उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी बढ़ा है। रोहित ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी जहाँ दो बच्चों को एक साथ पढ़ाया जा सके, इसलिए उनके बड़े भाई ने पढ़ाई छोड़ दी ताकि रोहित पढ़ाई कर सकें।
उन्हें लगता है कि अगर अब वह परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर सके तो यह उनके लिए परिवार की हार जैसा होगा।

बचत और भविष्य की योजना
रोहित ने कहा कि उनके पास 80 लाख रुपये की बचत है। उन्होंने 84 लाख रुपये का घर लिया है और पिता बनने के बाद एक कार खरीदी है। इन दोनों की हर महीने अच्छी-खासी ईएमआई जाती है।
इस महंगाई के जमाने में 80 लाख रुपये की बचत के बाद भी रोहित अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
जब शर्मा ने रोहित से पूछा कि क्या वह अपने काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए अपनी किसी एक नौकरी को छोड़ने पर विचार करेंगे, तो रोहित ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय लेने से पहले एक वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
रोहित ने बताया कि अगले 5 से 6 सालों में वह 7 या 8 करोड़ रुपये बचाना चाहते हैं। इसके बाद वह एक नौकरी छोड़ देंगे और सिर्फ अपनी अमेरिका वाली नौकरी जारी रखेंगे।
मूनलाइटिंग क्या है?
एक साथ कई नौकरियां करना मूनलाइटिंग कहलाता है। यह एक पार्ट-टाइम जॉब या फ्रीलांसिंग वर्क होता है, क्योंकि इसमें काम लैपटॉप और इंटरनेट से हो सकता है।
भारत में मूनलाइटिंग पर कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है। इसकी अनुमति मुख्य रूप से रोजगार अनुबंध, कंपनी की एचआर नीति और लागू श्रम कानूनों पर निर्भर करती है।
यदि कर्मचारी कंपनी की अनुमति के बिना प्रतिस्पर्धी कंपनी के लिए काम करता है या गोपनीय जानकारी साझा करता है, तो इसे अनुबंध का उल्लंघन माना जा सकता है।
मूनलाइटिंग का चलन कई दशकों से मौजूद है, लेकिन कोविड-19 के बाद (2020 से) और विशेष रूप से 2022 से भारत के आईटी सेक्टर में यह चर्चा का विषय बना।
मूनलाइटिंग का उद्देश्य अतिरिक्त आय कमाना, नए कौशल सीखना या अनुभव प्राप्त करना है।

