बुलंद सोच, जबलपुर।
रीवा की 11 वर्षीय बच्ची, जो पिछले दो महीनों से लगातार खांसी, तेज बुखार और निमोनिया से पीड़ित थी, का अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल्स में सफल उपचार किया गया।
जांच में यह सामने आया कि बच्ची के बाएं फेफड़े में लगभग दो महीने पहले सांस के रास्ते गया एक पेन का कैप फंसा हुआ था।
इस पेन कैप के कारण फेफड़े में गंभीर संक्रमण हो गया था और बड़ी मात्रा में पस जमा हो गई थी।
समय पर किए गए इस सफल उपचार से फेफड़े को संभावित गंभीर क्षति से बचाया जा सका।
चिकित्सकीय प्रक्रिया
अपोलो के सीनियर कंसल्टेंट-पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन डॉ. अम्बरीश जोशी ने बताया कि बच्ची की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तत्काल ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया गया।
पूरी प्रक्रिया के बाद बच्ची को सुरक्षित रूप से एक्सट्यूबेट किया गया।
वर्तमान में बच्ची की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है, उसे शीघ्र ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में एनेस्थीसिया टीम एवं ऑपरेशन थिएटर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें डॉ. बर्नाडेट, डॉ. अविप्सा, डॉ. मिलिंद और डॉ. सुमित शामिल थे।
अस्पताल की सुविधाएं
अपोलो जेबीपी हॉस्पिटल्स, जबलपुर में अत्याधुनिक ब्रोंकोस्कोपी सुविधाएं, अनुभवी पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की सहायता से श्वसन संबंधी जटिल एवं चुनौतीपूर्ण रोगों का सफल उपचार किया जा रहा है।
मरीजों को एक ही स्थान पर उन्नत जांच, विशेषज्ञ उपचार और समर्पित मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

