बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने ‘अंतर्गीता’ नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ऐप तैयार किया है। यह ऐप भगवद्गीता की शिक्षाओं को एआई से जोड़ता है और डिजिटल डायरी के साथ-साथ एक व्यक्तिगत साथी के रूप में कार्य करता है।
यह ऐप उपयोगकर्ता की डायरी, व्यवहार और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर उसकी समस्या को समझने का प्रयास करेगा। इसके उपरांत, यह परिस्थिति के अनुरूप भगवद्गीता की सीख उपलब्ध कराएगा।
इस ऐप को जल्द ही प्ले स्टोर पर लॉन्च करने की तैयारी चल रही है।
ऐप के विकास का विचार
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं प्रोजेक्ट लीड डॉ. सौरभ सिंह के अनुसार, ऐप तैयार करने का विचार स्वयं को समझने की कोशिश से आया था। उनका मानना था कि यदि ऐसी डिजिटल डायरी हो जो केवल बातें दर्ज करने के बजाय व्यक्ति की स्थिति को समझे और ज़रूरत के समय सही दिशा में सोचने में मदद करे, तो वह एक साथी की तरह काम कर सकती है। इसी विचार को एआई से जोड़कर ‘अंतर्गीता’ का विकास शुरू किया गया।
कॉलेज के प्राचार्य राजीव चांडक ने बताया कि ऐप अब तैयार है और जल्द ही इसका विमोचन किया जाएगा।
एक वर्ष में जोड़े गए नए फीचर्स
डॉ. माधुरी गोखले ने जानकारी दी कि शुरुआत में ऐप का बेसिक संस्करण तैयार किया गया था। बाद में आईआईटी मद्रास के एक स्टार्टअप कार्यक्रम में संभावित उपयोगकर्ताओं से फीडबैक लेकर इसमें नए फीचर्स जोड़े गए।
प्रमुख फीचर्स
ऐप में उपयोगकर्ता को लंबी डायरी लिखने की आवश्यकता नहीं होगी। दिनभर की छोटी-छोटी घटनाओं, अनुभवों या विचारों को एंट्री के रूप में दर्ज किया जा सकेगा। ऐप इन एंट्री का विश्लेषण कर अगले दिन फीडबैक देगा, जिसका उद्देश्य बार-बार सामने आने वाली समस्याओं और व्यवहार के पैटर्न को पहचानने में मदद करना है।
‘हील योरसेल्फ’ फीचर उपयोगकर्ता की समस्या के अनुरूप भगवद्गीता के संबंधित श्लोक और उनका अर्थ सामने लाएगा। गीता की सीख को नई पीढ़ी तक सरल तरीके से पहुंचाने के लिए श्लोक की व्याख्या स्टोरी, कॉमिक और वीडियो के माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
‘गीता कंपेनियन’ के ज़रिए उपयोगकर्ता अपनी समस्या या सवाल चैट के माध्यम से पूछ सकेगा। इस ऐप का उद्देश्य सामान्य एआई जवाब देने के बजाय भगवद्गीता की शिक्षाओं के आधार पर परिस्थिति से संबंधित ज्ञान उपलब्ध कराना है। भविष्य में अन्य प्रमुख ज्ञान और दर्शन की पुस्तकों को भी इसके कोर में शामिल करने की संभावना है।
डिजिटल वेलबीइंग फीचर यह समझने में मदद करेगा कि उपयोगकर्ता मोबाइल पर किस ऐप में कितना समय दे रहा है और उसका इस्तेमाल उत्पादक है या वह अनावश्यक रूप से विचलित हो रहा है। वहीं, कर्मा स्कोर और ग्रेटिट्यूड लॉग सकारात्मक गतिविधियों को दर्ज कर उपयोगकर्ता को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करेंगे।
विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
ऐप के विकास में स्टूडेंट अविषा गुप्ता ने गीता की सामग्री को वेक्टर डेटाबेस में संरचित कर एआई के अनुरूप तैयार किया। दिनकर दुबे ने यूआई/यूएक्स डिजाइन और डिप्लॉयमेंट की जिम्मेदारी संभाली। प्रो. देवयानी सोनी और प्रो. सुधांशु डोले ने ऑडियो-वीडियो कंटेंट के कस्टमाइजेशन पर काम किया, जबकि डीन रिसर्च डॉ. कमल कुशवाहा ने रिसर्च सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग दिया।

