बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर। जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के एक मामले में महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित करते हुए सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने और रकम बरामद होने के बावजूद, यदि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाए कि आरोपित ने रिश्वत की मांग की थी, तो केवल रकम की बरामदगी के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, लोकायुक्त जबलपुर ने संभागीय उपायुक्त, वाणिज्य कर कार्यालय में पदस्थ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। उन पर आरोप था कि उन्होंने मुंबई की एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल एजेंसी के अधिकृत प्रतिनिधि सुरेश कुमार गुप्ता से सेल्स टैक्स निर्धारण संबंधी फाइल दिखाने और प्रस्तुत करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी।
बचाव पक्ष की अधिवक्ता नम्रता के. अग्रवाल ने न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किया कि कथित रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग में आरोपित की आवाज होने का तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि शिकायतकर्ता और आरोपित पूर्व परिचित थे तथा दोनों के बीच पहले विवाद भी हो चुका था।
अधिवक्ता अग्रवाल ने न्यायालय को अवगत कराया कि जिस फाइल को दिखाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप था, उससे संबंधित अपीलीय आदेश पूर्व में ही संबंधित जर्नल में प्रकाशित हो चुका था।
विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पीसी एक्ट की धारा 20 के तहत उपधारणा के लिए आरोपित के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद होना अकेले पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को असम्यक लाभ की मांग किए जाने का तथ्य भी प्रमाणित करना होगा।
न्यायालय ने आगे कहा कि केवल मुद्रा की बरामदगी से पीसी एक्ट की धारा-सात के तहत अपराध स्वतः गठित नहीं होता है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपित प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त कर दिया।

