बुलंद सोच, पेटलावद।

देशभर में शेयर बाजार में निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर कथित साइबर फर्जीवाड़े का बड़ा नेटवर्क अब झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र से जुड़ गया है। पेटलावद के छोटे से गांव रूपगढ़ निवासी विनोद कुमार राठौर को इस मामले में सह-आरोपित बनाया गया है, जिन्हें उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने 22 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इसके बाद हुई जांच और पूछताछ में कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आई है। 2934 करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे कथित नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन और फर्जीवाड़े के संदर्भ में सामने आया है, जिसे विनोद कुमार राठौर से जुड़ा नहीं माना जा सकता।
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी
मुख्य आरोपित अनुराग अरविंद श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने 31 जुलाई 2026 को नागपुर से गिरफ्तार किया था।
इसके बाद मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से तीन अन्य आरोपितों को पकड़ा गया, जिनमें रूपगढ़ निवासी विनोद कुमार राठौर, महाराष्ट्र के ठाणे निवासी सुधीर गंगाधर दास और शेख नदीम सलीम शामिल हैं। इन तीनों को गिरफ्तार कर पारगमन रिमांड पर लखनऊ लाया गया।
ठगी का तरीका
एसटीएफ के डिप्टी एसपी सुधांशु शेखर के मुताबिक, गिरोह के लोग इंटरनेट और अन्य सामाजिक माध्यमों पर शेयर बाजार में निवेश और गेमिंग से जुड़े विज्ञापन चलाते थे। स्टॉक मार्केट एनालिसिस और ट्रेनिंग के नाम पर लोगों को शेयर बाजार तथा कंपनियों के आईपीओ में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। विज्ञापनों के जरिए संपर्क में आने वाले लोगों को इंटरनेट समूहों में जोड़ा जाता था, जहां शेयर बाजार में ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश की जानकारी देने के नाम पर भरोसा बनाया जाता था। विनोद भी निवेश और गेमिंग से जुड़े विज्ञापन दिखाकर मुनाफे का लालच देकर लोगों से निवेश करवाता था।
निवेशकों को प्रभावित करने के लिए दस से 50 गुना तक मुनाफे के फर्जी स्क्रीन शॉट दिखाए जाते थे। इसके बाद लिंक के जरिए एसीआइ सेंचुरी एप डाउनलोड कराया जाता था। एप पर निवेश की राशि और मुनाफा लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता था, जिससे निवेशक को लगता था कि उसका पैसा शेयर बाजार में लगाया जा रहा है और उसे मुनाफा मिल रहा है। एसटीएफ के अनुसार, एप पर दिखाई जाने वाली रकम और मुनाफा वास्तविक नहीं था। निवेशकों से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी और बाद में इसे कई खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
कानूनी कार्रवाई और बरामदगी
शिकायतकर्ता अपूर्वा राय की शिकायत पर लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 चार, 319 दो और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत कार्रवाई की गई है। तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ पहले मुख्य आरोपित अनुराग अरविंद श्रीवास्तव तक पहुंची थी।
जांच के दौरान आरोपितों से जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटाकर करीब दो करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए हैं। कार्रवाई में एक मैकबुक, सात मोबाइल फोन, एक पासपोर्ट और एक हैरियर कार बरामद की गई है। इसके अलावा अन्य बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ के डिप्टी एसपी सुधांशु शेखर के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस कथित गिरोह से जुड़ी 3087 ऑनलाइन शिकायतों का उल्लेख सामने आया है। वहीं लखनऊ और अंडमान-निकोबार सहित अलग-अलग स्थानों पर 11 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

