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मध्य प्रदेश 27% OBC आरक्षण: EWS कोटा से कुल आरक्षण 60% होने पर ओबीसी पक्ष ने आपत्ति को अनुचित बताया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ के समक्ष लगातार आठवें दिन सुनवाई हुई। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ इस प्रकरण की सुनवाई कर रही है। ओबीसी पक्ष की ओर से दूसरे दिन भी विस्तृत बहस जारी रही, हालांकि यह पूरी नहीं हो सकी। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है। ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह, परमानंद साहू, उदय साहू, आरजी वर्मा, अभिलाषा लोधी और रामभजन लोधी ने पैरवी की। ओबीसी पक्ष की बहस पूरी होने के बाद राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी।

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ओबीसी पक्ष के मुख्य तर्क

ओबीसी पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने तर्क दिया कि संविधान में अन्य पिछड़ा वर्ग सहित सभी प्रकार के आरक्षण का आधार जनसंख्या और समुचित प्रतिनिधित्व है, न कि क्वांटिफायबल डेटा। उन्होंने कहा कि केवल ओबीसी आरक्षण को अधिक बताकर चुनौती देना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण लागू करने से पहले भी इस प्रकार का डेटा एकत्र नहीं किया गया था। बहस के दौरान कहा गया कि लगभग 51 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी वर्ग को लंबे समय तक केवल 14 प्रतिशत आरक्षण मिला, जिसे बाद में बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। यदि अन्य वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व दिया गया है, तो केवल ओबीसी आरक्षण पर ही आपत्ति उठाना न्यायसंगत नहीं है। ओबीसी पक्ष ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत किन संवैधानिक और प्रशासनिक आधारों पर तय किया गया।

संवैधानिक और कानूनी संदर्भ

अधिवक्ता शाह ने संविधान सभा की चर्चाओं, काका कालेलकर आयोग (1955), मंडल आयोग (1980), इंद्रा साहनी प्रकरण तथा तमिलनाडु में लंबे समय से लागू आरक्षण व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में आरक्षण की अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय का दायित्व कानून की व्याख्या करना है, नया कानून बनाना नहीं।

EWS आरक्षण और कुल कोटा

ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। ओबीसी पक्ष ने कहा कि 103वें संविधान संशोधन के बाद ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया, जिसे मध्य प्रदेश में वर्टिकल श्रेणी में लागू करने से कुल आरक्षण 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ऐसे में केवल ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक बताना उचित नहीं है।