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2026-08-06

मंत्रालय सेवा संघ ने अगली डीपीसी में अर्हताकारी सेवा नियम में पूर्ण छूट का आग्रह किया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मध्य प्रदेश में 10 साल बाद हुई पदोन्नति प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो गया है। इसके बाद अब दूसरे और तीसरे चरण के लिए होने वाली डीपीसी में सरकार से गलतियां सुधारने का आग्रह किया जा रहा है।

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने कहा है कि सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में प्रस्तावित डीपीसी में अर्हताकारी सेवा के नियम में पूर्णतः छूट प्रदान की जानी चाहिए।

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यह छूट नियमों में विसंगति के चलते तीस साल से सेवा दे रहे और दस साल पहले से पदोन्नति के पात्र रहे कर्मचारियों-अधिकारियों की पदोन्नति का कैडर सही करने के उद्देश्य से मांगी गई है।

मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि मौजूदा नियम के अनुसार, किसी पद पर न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा कर लेने के उपरांत ही कोई अधिकारी-कर्मचारी अगले पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना जाता है, जिसे प्रशासनिक शब्दावली में अर्हताकारी सेवा कहा जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि उचित कारण विद्यमान होने पर कैबिनेट इस न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा में छूट प्रदान कर सकती है, जिसका अर्थ है कि 5 वर्ष से कम सेवा होने पर कैबिनेट के अनुमोदन से अगले पद पर पदोन्नति दी जा सकती है।

नायक के अनुसार, इस समय प्रदेश में असाधारण परिस्थिति उत्पन्न हुई है क्योंकि बिना किसी विधिसम्मत कारण के 10 वर्ष तक पदोन्नतियां बंद रहीं और बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो अधिकारी-कर्मचारी 10 वर्ष पहले पदोन्नति के लिए पात्र थे, वे 10 वर्ष बाद पदोन्नत हुए हैं, और 10 वर्ष सीनियर अधिकारी-कर्मचारी अपने से 10 वर्ष जूनियर अधिकारी-कर्मचारी के साथ-साथ पदोन्नत हुए हैं, जो एक ऐसी स्थिति है जो पहले कभी उत्पन्न नहीं हुई थी।

नायक ने बताया कि जो अधिकारी-कर्मचारी अभी 2026 में पदोन्नत हुए हैं, वे अगली डीपीसी (सितंबर 2026 एवं जनवरी 2027) के समय तक 5 वर्ष की अर्हताकारी सेवा के दायरे में न आने के कारण विचारण क्षेत्र में नहीं आएंगे और उन्हें ऐसी हानि उठानी पड़ेगी जिसके लिए वे दोषी नहीं हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि प्रदेश की असामान्य परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को एक बार के लिए कैबिनेट के अनुमोदन से अगली पदोन्नति के लिए विचारण क्षेत्र में शामिल करने का निर्णय लिया जाए।

इस निर्णय से 10 वर्ष तक पदोन्नतियां बंद रहने से हुई हानि की कुछ हद तक भरपाई संभव हो सकेगी, साथ ही निचले पद रिक्त होने की संख्या बढ़ जाएगी जिस पर शासन सीधी भर्ती कर सकेगा, जिसका लाभ प्रदेश के बेरोजगारों को मिलेगा।