बुलंद सोच, भोपाल।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार उच्च शिक्षा का निजीकरण कर उसे उद्योग में बदलना चाहती है।
कांग्रेस के आरोप और चिंताएं
कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि यह संशोधन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है। डॉ. अलावा ने आरोप लगाया कि सरकार निजी विश्वविद्यालयों के लिए 5 करोड़ रुपए की सुरक्षा राशि जमा करने की अनिवार्यता और 2500 वर्गमीटर भूमि की शर्त खत्म कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब भाजपा राज में एक कमरे में भी विश्वविद्यालय संचालित हो जाएगा। डॉ. अलावा ने सवाल उठाया कि बिना कैंपस, हॉस्टल और लैब कैसी पढ़ाई होगी। उनके अनुसार, किसी भी विश्वविद्यालय के लिए कैंपस, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, चिकित्सा सुविधा और शोध संस्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं जरूरी होती हैं। डॉ. अलावा ने कहा कि यदि इन शर्तों को कमजोर किया जाएगा तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी। उनके मुताबिक, निजी विश्वविद्यालयों को इन आवश्यक व्यवस्थाओं से छूट देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा का औद्योगीकरण कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम है। उनके अनुसार, ऐसे संशोधन से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।
एबीवीपी का मोर्चा
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी विरोध जताया है। परिषद का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ावा देगा। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों के लिए भूमि और अन्य आवश्यक मानकों में ढील देने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी तथा निजी संस्थानों को मनमानी की छूट मिल जाएगी। परिषद ने सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने और गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं छात्रहितैषी उच्च शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। एबीवीपी ने साथ ही स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा और छात्र हितों पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा।
