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2026-07-22

मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मोहन यादव सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को पारित कराने में सफल रही।

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प्रमुख प्रावधान

यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधान लागू होंगे। संपत्ति के उत्तराधिकार में बेटे और बेटियों को उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो, समान अधिकार दिए गए हैं। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार किया जाएगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है। वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे। कोई भी वयस्क अपनी स्वयं अर्जित या पैतृक संपत्ति की 100 प्रतिशत वसीयत अपनी इच्छा से कर सकेगा। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार का अधिकार खो देगा। यदि कोई कानूनी वारिस नहीं होगा, तो संपत्ति राज्य के पास चली जाएगी।

लिव-इन रिलेशनशिप के नियम

बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज़्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 रुपये जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 रुपये जुर्माना का प्रावधान है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

विधेयक की प्रकृति और दायरे

मध्य प्रदेश का यह प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड आधुनिक सामाजिक आवश्यकताओं, जेंडर इक्वलिटी और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला एक प्रगतिशील विधिक ढांचा है। यह अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर समाज के सभी वर्गों में लैंगिक समानता लाने और कमजोर वर्गों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। समान नागरिक संहिता अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के बयान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी” चौपाई का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के नागरिकों के सामाजिक और धार्मिक संस्कार पहले की तरह जारी रहेंगे। प्रदेश में होने वाले सभी विवाहों का शासकीय पंजीयन अनिवार्य होगा और पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि एक पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह और एक पति के रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। कांग्रेस के लगातार हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और सामाजिक समानता का कानून बताया और सभी दलों से इसका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन भोपाल को तत्काल आजाद घोषित नहीं किया गया था और उसे पाकिस्तान से मिलाने की कोशिश की गई थी, ऐसे लोगों को “डूब मरना चाहिए।”