BREAKING NEWS
2026-08-08

गर्भवती महिलाओं को सरकारी सुविधा न मिलने पर निजी केंद्रों में मुफ्त सोनोग्राफी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

गर्भवती महिलाओं को अब सोनोग्राफी के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन खराब है या डॉक्टर उपलब्ध नहीं है, तो उनकी सोनोग्राफी निजी केंद्रों में बिल्कुल मुफ्त कराई जाएगी और इसका पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ी की गुंजाइश को खत्म करने के लिए इस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और कैशलेस कर दिया गया है।

Advertisement

रेफरल और ई-वाउचर प्रक्रिया

सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ, पीजीएमओ या मेडिकल ऑफिसर ओपीडी में जांच के बाद सोनोग्राफी की सलाह देंगे। इसके बाद महिला के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए एक ई-वाउचर भेजा जाएगा, जिससे वह सात दिनों के भीतर किसी भी अधिकृत निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जाकर मुफ्त जांच करवा सकेगी। आपातकाल की स्थिति में, एक गर्भवती महिला की अधिकतम दो बार तक सोनोग्राफी कराई जा सकेगी। यह सुविधा विशेष रूप से उन जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए है जहाँ सरकारी सोनोलाजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं या वे लंबे अवकाश पर हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चिन्हित सभी स्वास्थ्य संस्थाओं से भी रेफरल किया जा सकेगा।

डिजिटल रिकॉर्ड और भुगतान

निजी केंद्रों में होने वाली प्रत्येक सोनोग्राफी की रिपोर्ट और मरीज की जानकारी ओडीके ऐप के माध्यम से सीधे ऑनलाइन अपलोड की जाएगी, जिससे रिपोर्ट में हेराफेरी रोकी जा सकेगी। भुगतान प्रक्रिया के लिए सुमन यूएसजी पोर्टल तैयार किया गया है। निजी सेंटर संचालकों को अपना बैंक अकाउंट, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबर पोर्टल पर दर्ज कराना होगा। जांच पूरी होने के बाद सेंटर एक ई-वाउचर बनाएगा, जिसे अस्पताल द्वारा अप्रूव किया जाएगा। अप्रूवल मिलने के बाद, ₹500 प्रति केस का भुगतान सीधे सेंटर के खाते में स्पर्श पोर्टल के जरिए कर दिया जाएगा।

योजना के लाभ और कार्यान्वयन

गर्भावस्था के दौरान समय पर सोनोग्राफी से मां और बच्चे को होने वाले खतरों और बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में ही हो सकेगी, जिससे समय पर उपचार मिलेगा और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। यह योजना पूरे प्रदेश में लागू की गई है। इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीएमएचओ कार्यालय भोपाल ने निजी सोनोलाजिस्टों को प्रशिक्षण प्रदान किया है, जिसमें उन्हें ई-वाउचर बनाना, रिकॉर्ड रखना और भुगतान प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

अधिकारी का बयान

भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सुमन यूएसजी पोर्टल पर गर्भवती की सोनोग्राफी की स्पेशल फाइंडिंग्स देखकर गर्भावस्था के जोखिमों की जानकारी लेना अब आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल सिस्टम से महिलाएं समय पर मुफ्त जांच करवा सकेंगी और मरीज का पूरा रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध हो जाएगा। डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि निजी सेंटरों के सहयोग से हर महिला तक यह सुविधा पहुंचाना उनका लक्ष्य है।